मिल्कीपुर में आक्रामक रहा सीएम का प्रचार
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में मनाए दीपोत्सव पर मिल्कीपुर की जीत की रणनीति तैयार कर ली थी। लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी सीएम ने राममंदिर निर्माण में रोड़ा अटकाने, कारसेवकों पर गोलियां चलवाने और मुस्लिमों के ध्रुवीकरण के लिए सपा नेताओं के रामलला के दर्शन से दूरी बनाने का मुद्दा उठाया, जो हिंदू समाज को एकजुट करने में मददगार रहा।
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. एपी तिवारी कहते हैं कि सपा ने फैजाबाद लोकसभा सीट पर जीत के गलत मायने निकाले। उसने भाजपा प्रत्याशी के प्रति फैली नाराजगी मानने के बजाय हिंदुत्व की राजनीति का पटाक्षेप मान लिया। यहीं सपा चूक कर गई।
सपा का हिंदुत्व विरोध भी पिछड़ों-दलितों को भाजपा के पक्ष में एकजुट करने में मददगार रहा। सपा नेतृत्व का मानना था कि हिंदुत्व का विरोध उन्हें मुस्लिमों के बीच नायक बना देगा। वह भूल गए कि हिंदुत्व के एजेंडे पर भाजपा अब 90 के दशक से ज्यादा मुखर है। यही नहीं, उनके पास इस मुद्दे पर गिनाने को भी बहुत कुछ है। यही वजह है कि सपा को अवधेश के जरिये हिंदुत्व की राजनीति ध्वस्त करने की कोशिश महंगी पड़ी।