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केजीएमयू में आधी रात शुरू हुआ लिवर ट्रांसप्लांट

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केजीएमयू में आधी रात शुरू हुआ लिवर प्रत्यारोपण
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ब्रेनडेड डालीगंज निवासी युवक का लिवर लखीमपुर खीरी की महिला को किया जा रहा प्रत्यारोपित
10 घंटे चलेगी प्रक्रिया, हालांकि प्रत्यारोपण की जानकारी देने से बचता रहा केजीएमयू प्रशासन
केजीएमयू में सोमवार आधी रात के बाद लिवर प्रत्यारोपण शुरू हो गया। सड़क दुर्घटना में 16 अगस्त को घायल डालीगंज निवासी 45 वर्षीय सुबोध के ब्रेनडेड घोषित होने पर उनका लिवर लखीमपुर खीरी की महिला को प्रत्यारोपित किया जा रहा है। महिला लिवर सिरोसिस से पीड़ित थी। प्रत्यारोपण करीब 10 घंटे चलेगा। हालांकि केजीएमयू प्रशासन इसकी जानकारी देने से बचता रहा।
केजीएमयू में पहला लिवर प्रत्यारोपण मार्च में हुआ था। इसके बाद चार लाइव प्रत्यारोपण किए गए। वहीं 25 जून को पहला कैडवर लिवर प्रत्यारोपण हुआ था, जिसमें सुल्तानपुर निवासी महिला का लिवर मेरठ निवासी युवक को प्रत्यारोपित किया गया था। जानकारी के मुताबिक सुबोध 16 अगस्त को मलिहाबाद में सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। सुबोध के सिर में गंभीर चोट आई थी। उन्हें ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में भर्ती किया गया था। सोमवार दोपहर उन्हें ब्रेनडेड घोषित किया गया। इसकेबाद केजीएमयू की टीम सुबोध के परिवारीजनों से अंगदान के लिए बातचीत शुरू की। पिता के राजी होने के बाद प्रत्यारोपण की तैयारी शुरू की गई। रात करीब नौ बजे कागजी कार्रवाई पूरी हुई। इसके बाद टीम ट्रांसप्लांट यूनिट पहुंची।
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तीन मरीजों को बुलाया गया था
युवक के परिवारीजनों के लिवर डोनेशन के लिए राजी होने के बाद तीन मरीजों को बुलाया गया था। इसमें महिला को प्रत्यारोपण के लिए चुना गया। केजीएमयू ने टीम ने लखीमपुर की महिला को शाम करीब पांच बजे ही प्रत्यारोपण यूनिट में पहुंचा दिया था। उसकी सभी जरूरी जांचें पूरी कर ली गई थी।
केजीएमयू ने की है नई शुरुआत
संस्थान में चार लिवर प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं, जिसमें तीन लिविंग डोनर और एक ब्रेन डेड डोनर ( कैडवर) से प्राप्त लिवर प्रत्यारोपण हुआ है। केजीएमयू ने प्रदेश में पहली बार कैडवर लिवर प्रत्यारोपण किया है। इसमें मैक्स हॉस्पिटल की टीम ने भी सहयोग किया। कैडवर लिवर प्रत्यारोपण शुरू होने से लिवर सिरोसिस से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए एक नया रास्ता खुला है। ब्रेनडेड होने वाले मरीजों के परिवारीजनों को अंगदान के लिए प्रेरित करने के लिए प्रत्यारोपण विभाग के काउंसलरों की टीम लगी हुई है।
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कैडवर में तत्काल करते हैं प्रत्यारोपण
ब्रेनडेड वाले से अंग लेकर दूसरे मरीज में प्रत्यारोपण तत्काल किया जाता है। यही वजह है कि एक तरफ डोनर केपरिवारीजन को तैयार किया जाता है तो दूसरी तरफ प्रत्यारोपण के लिए तीन मरीज तैयार रखे जाते हैं। इन तीनों की स्कोरिंग की जाती है। इसकेबाद टीम तय करती है कि किस मरीज को अंग की ज्यादा जरूरत है। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में दुर्घटनाग्रस्त होकर प्रतिदिन करीब 100 से 130 मरीज आते हैं। इसमें करीब 10 से 20 की मौत हो जाती है। इसमें करीब पांच से आठ ब्रेनडेड होने पर अंग प्रत्यारोपण के योग्य होते हैं।
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