मेट्रो रेल को सरकार की ओर से भरपूर आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने 2014-15 के बजट में 95 करोड़ रुपये जारी किए हैं। ये रकम प्रदेश सरकार के 20 फीसदी के हिस्से में होगी।
इसके अलावा मेट्रो के लिए चक गंजरिया परियोजना, एलडीए, यूपीएसआईडीसी और आवास विकास परिषद अलग से धन दे रहे हैं। इस तरह से पहले आठ किमी पर इस साल आने वाले खर्च में समस्या नहीं होगी।
मेट्रो रेल परियोजना में निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया का आगाज भी कर दिया गया है। 541 करोड़ रुपये के सिविल कार्यों का टेंडर मंगलवार शाम दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोशन (डीएमआरसी) ने जारी कर दिया है।
माना जा रहा है कि 2017 विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले ही राजधानी में आठ किलोमीटर (ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग) मेट्रो दौड़ने लगेगी। रोलिंग स्टॉक को लेकर भी बहुत जल्द ही टेंडर दिया जाएगा।
ऐसे में सभी काम एक साथ पूरे होंगे। आठ किलोमीटर के पहले सेक्शन पर मेट्रो का काम एक साथ खत्म होगा। इसके लिए लगातार धन की आवश्यकता पड़ेगी।
प्रदेश सरकार के बजट में मेट्रो रेल परियोजना को इस साल के वित्तीय वर्ष का हिस्सा जो कि 95 करोड़ रुपये का है, उसका प्रावधान कर दिया गया है।
मालूम हो कि राजधानी में मेट्रो के नार्थ-साउथ कॉरिडोर में कुल 6800 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसमें से प्रदेश सरकार को 20 फीसदी, केंद्र सरकार को 20 फीसदी धन देना होगा जबकि बाकी व्यवस्था लोन के जरिए की जाएगी।