शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी की परिवहन जरूरतों को मेट्रो सेवा ही पूरा कर सकती है। शहरी यातायात की यह रीढ़ की हड्डी साबित होगी।
सोमवार को यूपी मेट्रो के एमडी कुमार केशव ने यह जानकारी लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन के कार्यक्रम में दी।
कुमार केशव का कहना था कि लखनऊ मेट्रो ने कोविड के बाद सबसे तेज राइडरशिप वापस पाने में सफलता पाई है।
यह कोविड पूर्व की राइडरशिपका 60 प्रतिशत है। कोरोना से बचाव के लिए उठाए गए सैनिटाइजेशन संबंधी कदमों को भविष्य में भी जारी रखा जाएगा।
लखनऊ मेट्रो ने निर्धारित समय सीमा से 36 दिन पूर्व ही निर्माण कार्य पूरा कर अन्य मेट्रो परियोजनाओं के लिए एक मिसाल पेश की है। लखनऊ की तरह ही कानपुर में भी निर्माण प्रक्रिया पूरी तेजी से आगे बढ़ रही है।
जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की निदेशक कविता पाठक ने अपने संस्थान द्वारा किए गए एक शोध का हवाला देते हुए बताया कि लखनऊ में मेट्रो द्वारा यात्रियों को प्रदान की जा रही सुविधाओं जैसे, गोस्मार्ट कार्ड तथा टिकट वेंडिंग मशीनों के बारे में लोगों में जागरूकता आ चुकी है।
कुमार केशव ने बताया कि ट्रेनों के त्वरित और कम लागत में सैनिटाइजेशन के लिए अल्ट्रावायलेट किरणों का भी सहारा लिया जाएगा।
कोविड के बाद आने वाले समय में मेट्रो परियोजनाओं की फंडिंग के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल सबसे उपयुक्त होगा।
शहर के परिवहन व्यवस्था को और भी सुचारु और यात्रा के अनुकूल बनाने के लिए ‘वन सिटी वन कार्ड‘ जैसे सिस्टम की आवश्यकता है।