रायबरेली में प्राथमिक स्कूल पूरे तिवारी और प्राथमिक स्कूल अहमदपुर का विलय प्राथमिक स्कूल किलौली में किया गया। रास्ते में हाईवे पड़ता है। पूरे तिवारी के 31 बच्चों को तीन किमी तो अहमदपुर के 29 बच्चों को 1.5 किमी दूर जाना पड़ रहा है। अभिभावक बच्चों को इतनी दूर भेजने को तैयार नहीं हैं। प्राथमिक विद्यालय कुटी का विलय तीन किमी दूर प्राथमिक विद्यालय रैन में किया गया। जिले में 129 विद्यालयों का विलय हुआ है।
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देवरिया के रामपुर कारखाना में छात्र संख्या और संसाधनों के मामले में पहले से ही बेहतर प्राथमिक विद्यालय गोविंदपुर को कंपोजिट विद्यालय मदिरापाली के साथ विलय किया गया। गौरीबाजार में प्राथमिक विद्यालय मलिया टोला को डेढ़ किमी दूर दूसरे ग्राम पंचायत के प्राथमिक विद्यालय करमाजीतपुर में विलय किया गया। देवरिया में कुल 251 विद्यालयों का विलय किया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में कम नामांकन वाले 10827 परिषदीय विद्यालयों का विलय (पेयरिंग) किया है। हालांकि, विलय में स्पष्ट मानक न होने से जिलास्तर पर मनमानी की गई। कहीं स्कूलों का विलय दो से तीन किमी दूर कर दिया गया तो कहीं बच्चों को हाईवे और रेलवे लाइन पार करके जाना पड़ रहा है।
कहीं पूरे शिक्षक नहीं हैं तो कई जगह खराब रास्ते रोड़ा बन रहे हैं। बच्चे स्कूल जाने को तैयार नहीं हैं। कुशीनगर में 178 विद्यालयों का विलय हुआ है। विलय के बाद नए विद्यालयों में आधे बच्चे भी नहीं पहुंच रहे। ऐसे में अधिकारियों को बच्चों व अभिभावकों को मनाने और फायदे बताने के लिए गांव-गांव जाना पड़ रहा है।
ये हालत कुशीनगर समेत कई जिलों की है। अब जिले-जिले में स्कूलों के विलय का विरोध मुखर हो रहा है। कानपुर देहात, उन्नाव, हरदोई समेत कई जिलों में बच्चे और अभिभावक सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षक संगठनों के साथ ही स्थानीय लोग व जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल हो गए हैं।
अभिभावकों का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने लोगों से बिना संवाद किए और बिना जमीनी हकीकत समझे जल्दबाजी में विलय का निर्णय लिया। अगर अधिकारियों ने संवाद के बाद फैसला लिया होता तो यह स्थिति न आती। विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने न तो विद्यालयों की दूरी देखी न बच्चों की दिक्कत, बस ताबड़तोड़ विलय कर दिया।
देवरिया में तो ज्यादा दूरी को देखते हुए बीएसए ने 30 विद्यालयों के विलय का आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, कई जिलों में अब भी बच्चों व अभिभावकों की दिक्कत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों के विरोध के बीच आशंका है कि आने वाले दिनों में ड्रॉपआउट दर बढ़ सकती है।