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स्कूलों का विलय: न देखी दूरी और न दिक्कत बस मर्ज कर दिया स्कूल, साफ दिख रही अधिकारियों की मनमानी

Thu, 24 Jul 2025 06:56 AM IST
रोहित मिश्र अक्षय कुमार, अमर उजाला, लखनऊ

सार

Merger of schools: पूरे प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों में विलय को लेकर हुई मनमानी के मामले सामने आ रहे हैं। शासन के द्वारा इस आदेश का ग्राउंड लेवल पर अधिकारियों ने ढंग से होमवर्क नहीं किया। 
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स्कूल बंद होने की जानकारी इस तरह के दृश्य सामने आ रहे हैं। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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केस 1

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रायबरेली में प्राथमिक स्कूल पूरे तिवारी और प्राथमिक स्कूल अहमदपुर का विलय प्राथमिक स्कूल किलौली में किया गया। रास्ते में हाईवे पड़ता है। पूरे तिवारी के 31 बच्चों को तीन किमी तो अहमदपुर के 29 बच्चों को 1.5 किमी दूर जाना पड़ रहा है। अभिभावक बच्चों को इतनी दूर भेजने को तैयार नहीं हैं। प्राथमिक विद्यालय कुटी का विलय तीन किमी दूर प्राथमिक विद्यालय रैन में किया गया। जिले में 129 विद्यालयों का विलय हुआ है।

केस 2
देवरिया के रामपुर कारखाना में छात्र संख्या और संसाधनों के मामले में पहले से ही बेहतर प्राथमिक विद्यालय गोविंदपुर को कंपोजिट विद्यालय मदिरापाली के साथ विलय किया गया। गौरीबाजार में प्राथमिक विद्यालय मलिया टोला को डेढ़ किमी दूर दूसरे ग्राम पंचायत के प्राथमिक विद्यालय करमाजीतपुर में विलय किया गया। देवरिया में कुल 251 विद्यालयों का विलय किया गया है।
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 बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में कम नामांकन वाले 10827 परिषदीय विद्यालयों का विलय (पेयरिंग) किया है। हालांकि, विलय में स्पष्ट मानक न होने से जिलास्तर पर मनमानी की गई। कहीं स्कूलों का विलय दो से तीन किमी दूर कर दिया गया तो कहीं बच्चों को हाईवे और रेलवे लाइन पार करके जाना पड़ रहा है।

कहीं पूरे शिक्षक नहीं हैं तो कई जगह खराब रास्ते रोड़ा बन रहे हैं। बच्चे स्कूल जाने को तैयार नहीं हैं। कुशीनगर में 178 विद्यालयों का विलय हुआ है। विलय के बाद नए विद्यालयों में आधे बच्चे भी नहीं पहुंच रहे। ऐसे में अधिकारियों को बच्चों व अभिभावकों को मनाने और फायदे बताने के लिए गांव-गांव जाना पड़ रहा है।

ये हालत कुशीनगर समेत कई जिलों की है। अब जिले-जिले में स्कूलों के विलय का विरोध मुखर हो रहा है। कानपुर देहात, उन्नाव, हरदोई समेत कई जिलों में बच्चे और अभिभावक सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षक संगठनों के साथ ही स्थानीय लोग व जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल हो गए हैं।

अभिभावकों का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने लोगों से बिना संवाद किए और बिना जमीनी हकीकत समझे जल्दबाजी में विलय का निर्णय लिया। अगर अधिकारियों ने संवाद के बाद फैसला लिया होता तो यह स्थिति न आती। विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने न तो विद्यालयों की दूरी देखी न बच्चों की दिक्कत, बस ताबड़तोड़ विलय कर दिया।

देवरिया में तो ज्यादा दूरी को देखते हुए बीएसए ने 30 विद्यालयों के विलय का आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, कई जिलों में अब भी बच्चों व अभिभावकों की दिक्कत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों के विरोध के बीच आशंका है कि आने वाले दिनों में ड्रॉपआउट दर बढ़ सकती है।

बच्चे लाने के लिए लगाई शिक्षकों की ड्यूटी

विभाग ने भले ही कम नामांकन के आधार पर स्कूलों के विलय का निर्णय लिया लेकिन उसका यह कदम उल्टा पड़ रहा है। विलय के बाद स्कूलों में बच्चे बढ़ने के बजाय घट रहे हैं। लखनऊ, कुशीनगर, रायबरेली, बलरामपुर समेत कई जिलों में विलय वाले स्कूलों के बच्चों को उनके नए स्कूल तक लाने के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगानी पड़ गई है। सीडीओ ने आदेश जारी किया है कि जिन विद्यालयों में विलय किया गया है, वहां बच्चों की 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। ऐसी ही स्थिति कई जिलों की है।

ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापक लिख रहे पत्र

कानपुर देहात में भी स्कूलों के विलय में मनमानी देखने को मिली है। ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापक ने बीएसए को पत्र लिखा है कि प्राथमिक विद्यालय रामगढ़, मैथा का विलय करीब छह किमी दूर कंपोजिट स्कूल निवादा बारा में किया गया। बच्चों को राजकीय राजमार्ग से होकर जाना पड़ेगा। रास्ते में कीचड़ और पानी भी है। ऐसे में बच्चों का वहां जाना जोखिम भरा है। लिहाजा विद्यालय का विलय न किया जाए। कानपुर में ही प्राथमिक विद्यालय दुर्जापुर, राजपुर का विलय तीन किमी दूर रतापुर प्राथमिक विद्यालय में किया गया है। बच्चे और अभिभावक इसका विरोध कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर छाया है विभाग

यूपी के प्राइमरी स्कूल। - फोटो : अमर उजाला।
स्कूलों के विलय को लेकर बच्चों, अभिभावकों, ग्रामीणों के विरोध करते हुए वीडियो वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में महराजगंज में विद्यालय के गेट पर रोते हुए बच्चे कह रहे हैं कि वे इतनी दूर नहीं जा सकते। उनके पुराने स्कूल का ताला खोला जाए। लोगों ने कानपुर नगर के प्राथमिक विद्यालय गंभीरपुर को तीन किमी दूर विलय करने का रास्ता जाम कर विरोध किया।
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क्या बोलते हैं जिम्मेदार 

स्कूलों का विलय जमीनी हकीकत से कोसों दूर रहकर किया गया है। ड्रॉपआउट बढ़ रहा है। शिक्षकों को बच्चे स्कूल तक लाने की ड्यूटी पर लगाना पड़ा है। सीएम को फैसले पर रोक लगाने के लिए पहल करनी चाहिए।- डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ

स्कूलों की पेयरिंग सबकी सहमति से की जा रही है। अगर कहीं कोई दिक्कत है तो बीएसए व अन्य अधिकारियों को कहा गया है कि वे जमीनी स्तर पर निर्णय लें। अधिकतर विद्यालय एक किमी या उसके अंदर पेयर किए गए हैं।- कंचन वर्मा, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा
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