लखनऊ। खराब जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव और स्क्रीन की लत महिलाओं में अंडाशय की गांठ का खतरा बढ़ा रहा है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के सर्जरी विभाग की डॉ. सौम्या और डॉ. सुदर्शन ने बताया कि दो वर्षों में उनकी ओपीडी में ऐसे मामलों में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा प्रभावित 31 से 50 वर्ष की महिलाएं हो रही हैं, हालांकि अब किशोरियों में भी यह समस्या देखी जा रही है।
हाल ही में महिलाओं के स्वास्थ्य पर हुए एक शोध में इसे लेकर कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इनमें सबसे अधिक मामले 41-50 आयु वर्ग (39 मामले) और 31-40 आयु वर्ग (29 मामले) की महिलाओं के थे। पीड़ित महिलाओं में से 50 प्रतिशत में गर्भाशय से असामान्य रक्तस्राव की समस्या पाई गई। 30 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द की शिकायत रही।
कैंसर और बांझपन का खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, हालांकि ये गांठें शुरुआती दौर में गैर-कैंसरकारी होती हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करने पर भविष्य में इन गांठों के कैंसर में बदलने का जोखिम बढ़ जाता है। एंडोमेट्रियोमा या पीसीओएस जैसी मासिक धर्म से जुड़ी बीमारियां गर्भधारण की क्षमता प्रभावित करती हैं। गांठ फटने से पेट के अंदरूनी हिस्से में रक्तस्राव का खतरा रहता है। वहीं, गांठ का आकार बड़ा होने पर अंडाशय अपनी जगह से घूम सकता है, जिससे वहां रक्त का संचार रुक जाता है।
बचाव के लिए करें ये उपाय
- वजन नियंत्रित रखें, स्क्रीन लत कम करें।
- जीवनशैली को सुधारें और मानसिक तनाव से बचें।
- नमक का सेवन घटाएं।
- डाइट से कैफीन (चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक और चॉकलेट) का सेवन कम करें।
जानें, कब लें डॉक्टर की सलाह
-गांठ का आकार लगातार बढ़ रहा हो।
-गांठ बहुत सख्त महसूस हो रही हो।
-स्तन की त्वचा के रंग में बदलाव या सिकुड़न दिखाई दे।