लखनऊ। किसानों की आय बढ़ाने, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने और ग्रामीण उद्यमिता को मजबूती देने के उद्देश्य से केंद्रीय औषधीय एवं सुगंध पौधा संस्थान (सीमैप) में 30 और 31 जनवरी को राष्ट्रीय किसान मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले का केंद्र बिंदु औषधीय व सुगंधित फसलें, मूल्य संवर्धन, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण स्वरोजगार रहेगा।
मेला संयोजक डॉ. संजय कुमार ने बुधवार को प्रेसवार्ता में बताया कि आयोजन किसानों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का सशक्त मंच बनेगा। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 20 से अधिक राज्यों से करीब पांच हजार किसानों के आयोजन में शामिल होने की संभावना है।
उत्पादन से विक्रय तक की मिलेगी जानकारी
मेले में किसानों को औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती से लेकर कटाई के बाद प्रबंधन, प्रसंस्करण, मार्केटिंग और जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। एरोमा मिशन के तहत विकसित सफल मॉडल भी प्रदर्शित किए जाएंगे। महिलाओं को अगरबत्ती, गुलाब जल जैसे उत्पादों के निर्माण का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बताया कि शुक्रवार को राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक डॉ. धीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में किसानों को संबोधित करेंगे। 31 को सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी मुख्य अतिथि रहेंगी।
मेले में इस बार के आकर्षण : सांस्कृतिक रंग और नवाचार
- सीमैप किसान मेले में पहली बार पूर्वोत्तर के मेघालय के जयंतिया हिल्स के जनजातीय किसान लोकनृत्य व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।
- नारियल कवच और बेलपत्र से बनी क्रीम, कट फ्लावर संरक्षण तकनीक और उद्यमिता पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन होगा।
- सीमैप से जुड़े 121 सफल किसानों व उद्यमियों की उपलब्धियों पर आधारित टेबल बुक भी जारी की जाएगी।
- नवोन्मेषी किसानों के उत्पादों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र होंगे। किसान मामूली कीमत पर मेंथा, लेमनग्रास, सिट्रोनेला सहित उन्नत पौध सामग्री प्राप्त कर सकेंगे। मृदा परीक्षण और विशेषज्ञों से परामर्श की सुविधा भी मिलेगी।
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दो नई उन्नत किस्में होंगी लॉन्च
मेले में सिट्रोनेला की नई किस्म सिम-हरितिमा और अकरकरा की पहली भारतीय किस्म सिम-नित्या का विमोचन किया जाएगा। सिम-हरितिमा से प्रति हेक्टेयर 55 से 60 प्रतिशत तक अधिक सुगंध तेल उत्पादन संभव होगा।