सख्ती के लाख दावों के बावजूद दवाओं की बिक्री में मेडिकल स्टोर संचालकों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के औषधि अनुभाग के छापे में एक बार फिर से यह सच्चाई सामने आ गई। इंदिरानगर क्षेत्र के दो मेडिकल स्टोर में छापेमारी के दौरान किसी में भी फॉर्मासिस्ट उपस्थित नहीं मिला। एक मेडिकल स्टोर का संचालन पंजीकृत पते के बजाय दूसरे स्थान पर किया जा रहा था। टीम ने दोनों ही मेडिकल स्टोर में निर्देश के बावजूद विशिष्ट दवाओं के लिए अलग रजिस्टर नहीं बना रखा था। इसके अलावा दोनों मेडिकल स्टोर से संदिग्ध दवाओं के नमूने लिए गए और दोनों में बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई।
सहायक आयुक्त बृजेश कुमार के नेतृत्व में औषधि निरीक्षक माधुरी सिंह और नीलेश कुमार शर्मा की टीम ने इंदिरानगर सेक्टर-14 में संचालित मेसर्स अंबे फॉर्मेसी और मेसर्स सूर्या मेडीहब पर छापा मारा। छापे में पाया गया कि सूर्यामेडीहब का लाइसेंस सेक्टर-12 पर पंजीकृत हैं और उसका संचालन सेक्टर-14 में हो रहा है। मौके पर मालिक अमित सिंह मिले लेकिन कोई फॉर्मासिस्ट नहीं था। यहां दो संदिग्ध दवाओं के नमूने भी लिए गए। फर्म का स्थान परिवर्तन होने की प्रक्रिया पूरी होने तक इसे बंद कराया गया।
पेश नहीं किए गए टीबी की दवाओं के अभिलेख
अंबे फॉर्मेसी में छापे के दौरान मालिक नीतू सिंह उपस्थित मिलीं लेकिन उनके फॉर्मासिस्ट के रूप में काम करने वाले उनके पति आशीष सिंह मौके पर उपस्थित नहीं थे। यहां शेड्यूल दवाओं की बिक्री के लिए अलग से कोई रजिस्टर नहीं था। यहां तक कि टीबी की दवाओं की खरीद और बिक्री दोनों के लिए कोई अभिलेख पेश नहीं किया गया। यहां भी एक संदिग्ध दवा का नमूना भरा गया। इन दोनों फर्मों के खिलाफ औषधि अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की बात कही गई है