बजट पर बात करते चिकित्सा विशेषज्ञ।
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सरकार ने बजट में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किया है। चिकित्सा शिक्षा को बढ़ाने के लिए नए-नए संस्थान खोलने की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक विशेषज्ञ तैयार किए जा सकें। चिकित्सा व्यवस्था के आधारभूत ढांचे को अत्याधुनिक करने की रणनीति होनी चाहिए।
अभी हम प्राथमिक, सामुादायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं जिला अस्पताल में मरीजों के दिल, न्यूरो संबंधी व गैस्ट्रो संबंधी बीमारियों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं। चिकित्सकों के साथ ही चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी है। ऐसे में मरीजों को मेडिकल कालेजों, पीजीआई और एम्स की ओर से भागना पड़ता है। इसका दोहरा नुकसान है।
एक तरफ मरीज को चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़े संस्थानों की भाग दौड़ करनी पड़ती है तो दूसरी तरफ वहां मरीजों की भीड़ बढ़ने से शोध और शैक्षिक काम प्रभावित होते हैं। इसका असर भविष्य पर पड़ता है। इस बार के बजट में टैक्स स्लैब बढ़ाया गया है, यह बेहतरीन कदम है।
चर्चा में प्रोफेसर व प्लास्टिक सर्जन डॉ. विजय कुमार, प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग डॉ. अनूप वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर इमरजेंसी मेडिसिन डॉ. अविनाश अग्रवाल, प्रोफेसर व ट्रॉमा प्रभारी डॉ. सुरेंद्र कुमार, प्रोफेसर एनाटॉमी डॉ. नवनीत कुमार व गैस्ट्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. सुमित रूंगटा शामिल हुए।