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बुधवार को दिनभर नहीं खुलेंगी दवा की दुकानें

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मोदी सरकार के ऑनलाइन दवा बिक्री के फैसले के विरोध में लखनऊ सहित पूरे प्रदेश भर में सभी दवा दुकानें आज बंद रहेंगी। दवा दुकानों पर ताला लटकने से सबसे अधिक बुरा असर गंभीर रोगियों पर पड़ेगा।
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लखनऊ शहर के भीतर 72 हजार दवा दुकानों पर ताला लटकने से गंभीर रोगियों की जान मुश्किल में पड़नी तय है। बंदी को देखते हुए शहर की दवा दुकानों पर सुबह से लेकर शाम तक मरीजों की भीड़ लगी रही।

हालांकि इस बंदी में सरकारी अस्पतालों के भीतर मौजूद मेडिकल स्टोर और फॉर्मेसी में किसी तरह की बंदी नहीं रहेंगी। ऐसे में मरीजों को इन मेडिकल स्टोर से ही जीवनरक्षक दवाओं मिलने का सहारा रहेगा।
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ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में आज बुधवार को राजधानी लखनऊ में मौजूद कुल 72 हजार दवा दुकानों पर ताला लटका रहेगा। 72 हजार दवा दुकानों में 18 हजार थोक और 54 हजार फुटकर दवा विक्रेता है।

लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरीराज रस्तोगी ने बताया कि मोदी सरकार ऑनलाइन दवा बिक्री करने की तैयारी है। इसके विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन के महासचिव सुरेश गुप्ता ने एक दिन की बंदी का ऐलान किया है।

इसे देखते हुए बुधवार को शहर की सभी दवा दुकानें बंद रहेंगी। दवा दुकानें बंद रहने से सबसे बुरा असर अस्पतालों में भर्ती गंभीर रोगियों पर पड़ेगा जो लाइफ सेविंग ड्रग्स के सहारे जिंदगी काट रहे हैं।

जानिए कहां मिल सकेंगी दवाएं?

हालांकि दवा दुकानों की बंदी में शहर में संचालित हो रहे सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के मेडिकल स्टोर और फॉर्मेसी बंद नहीं रहेगी। ऐसे में गंभीर रोगियों को जरूरत पड़ने पर शहर के बड़े अस्पतालों के मेडिकल स्टोर से दवा मिल सकती है।

बुधवार को बंदी के चलते मंगलवार को दवा दुकानों पर गहमा-गहमी का माहौल रहा। मरीजों के तीमारदारों ने डॉक्टरों के कहने पर जरूरी दवाएं पहले से खरीद लीं जिससे हड़ताल के दौरान मरीज को परेशानी का सामना न करना पड़े। पहले से दवा खरीदने के चलते शहर के सभी मेडिकल स्टोर पर मरीजों और तीमारदारों का देर शाम तक तांता लगा रहा।

केंद्र सरकार के दमनकारी फैसले के विरोध में लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन बुधवार को विरोध मार्च निकालेगा। लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरीराज रस्तोगी ने बताया कि दोपहर बारह बजे कैसरबाग स्थित मेडिसिन मार्केट से पांच हजार से अधिक की संख्या में व्यापारी मार्च निकालेंगे।

मार्च कैसरबाग, लालबाग नावेल्टी, नगरनिगम कार्यालय होते हुए हजरतगंज स्थित जीपीओ पार्क पहुंचेगा। यहां दवा व्यापरी अपना विरोध दर्ज करा केंद्र सरकार ने अपना फैसला वापस लेने की मांग करेंगे।

बंदी से पहले 25 करोड़ का कारोबार

शहर की 72 हजार दुकानों में हड़ताल रहने की जानकारी के बाद दवा कारोबार 25 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया। लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश कुमार ने बताया कि राजधानी लखनऊ में रोजाना का दवा कारोबार 20 करोड़ का है लेकिन बुधवार को बंदी के चलते मंगलवार को देर शाम तक हुई दवा बिकवाली ने 25 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया।

ट्रॉमा सेंटर, केजीएमयू, लोहिया संस्थान समेत अन्य अस्पतालों के डॉक्टर भी हड़ताल को लेकर अलर्ट रहे। इसे देखते हुए मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने मरीजों के लिए इस्तेमाल हो रही जरूरी दवा पहले ही मंगा ली।

ट्रॉमा सेंटर की वेंटिलेटर यूनिट में भर्ती मरीज के तीमारदार सुभाष कुमार ने बताया कि वैसे तो रोजाना तीन से चार हजार की दवा और इंजेक्शन बाहर से लाने पड़ते थे।

हड़ताल को देखते हुए इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कुछ जरूरी इंजेक्शन पहले ही मंगा लिए जिसके लिए करीब 13 हजार रुपए खर्च करने पड़े। यही हाल लोहिया संस्थान में रहा जहां भर्ती मरीजों के तीमारदारों को एडवांस में दवा खरीदनी पड़ी।
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प्रदेश में आठ लाख दुकानें बंद

ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन के महासचिव सुरेश गुप्ता ने बताया कि पूरे भारत में आठ लाख दवा दुकानें हैं जिसमें ढ़ाई लाख थोक व साढ़े पांच लाख खुदरा हैं।

उत्तर प्रदेश में कुल दवा दुकानों की संख्या 1 लाख 12 हजार है जिसमें 72 हजार थोक और 40 हजार खुदरा दुकानें हैं। हड़ताल की वजह से इन दवा दुकानों पर दवा नहीं मिल सकेगी।

दवा कारोबारियों की हड़ताल का समर्थन लखनऊ व्यापार मंडल ने किया है। वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्र ने कहा कि केंद्र सरकार का तुगलकी फरमान का लखनऊ व्यापार मंडल पुरजोर विरोध करता है।

उन्होंने मांग करते हुए कहा कि दवा दुकानों के लिए फॉर्मासिस्टों की अनिवार्यता खत्म होनी चाहिए। ऑनलाइन फॉर्मासिस्टों का पंजीकरण भी समाप्त होना चाहिए।

ऑनलाइन दवा की बिक्री पर तत्काल प्रबंध लगना चाहिए क्योंकि इससे सात लाख व्यापारी और दस लाख कर्मचारी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए मंडल के सभी व्यापारी दवा विक्रेताओं के साथ हैं और उनके हक की लड़ाई के लिए वो हमेशा तैयार हैं।
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