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हर स्कूल में मेडिकल रूम जरूरी, पल्स ऑक्सीमीटर से भी होगी छात्रों की जांच

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हर स्कूल में मेडिकल रूम जरूरी, पल्स ऑक्सीमीटर से भी होगी छात्रों की जांच
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कोविड को देखते हुए राजधानी के हर स्कूल को मेडिकल रूम बनाना होगा। वहीं, थर्मल स्क्रीनिंग के साथ पल्स ऑक्सीमीटर भी रखना होगा।
15 अक्तूबर से चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोलने को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में विभिन्न बोर्ड के स्कूल प्रबंधकों, प्रतिनिधियों और अभिभावक संघ के सदस्यों की बैठक में डीएम अभिषेक प्रकाश ने ये निर्देश दिए।
उन्होंने कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अभिभावकों की सहमति पर ही छात्रों को स्कूल बुलाने का निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि मेडिकल रूम में दो बेड व अन्य सुविधाओं के साथ चिकित्सीय जानकारी रखने वाला विशेषज्ञ भी रहेगा।
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थर्मल स्क्रीनिंग के साथ छात्रों व स्टाफ की पल्स ऑक्सीमीटर से भी जांच अनिवार्य होगी। जिलाधिकारी ने कहा कि स्कूल तीन-तीन घंटे की दो शिफ्टों में चलेंगे।
वहीं, एसेंबली नहीं होगी और न ही ऐसी कोई गतिविधि, जिससे छात्र एक समूह में एकत्रित हों। उन्होंने स्कूल खुलने से पहले छात्रों के बैठने के स्थान, खेल मैदान में सैनिटाइजेशन करने का निर्देश दिया। पढ़ाई के दौरान कमरों की खिड़कियां व दरवाजे खुले रहेंगे।
बाद में जूनियर की भी चल सकती हैं कक्षाएं
डीएम ने कहा कि शासनादेश के अनुसार अभिभावक की लिखित सहमति से ही स्कूल खोले जाएंगे। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं प्राथमिकता पर जारी रहेंगी। प्रथम चरण में कक्षा 10 व 12 के विद्यालय खोले जाएंगे। द्वितीय चरण में कक्षा 9 व 11 के स्कूल खोले जाएंगे। इसके बाद स्थिति का जायजा लेते हुए छोटे बच्चों के स्कूल खोलने पर निर्णय लिया जाएगा। बैठक में अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल, सीएमएस के संस्थापक डॉ जगदीश गांधी, सीबीएसई के शहर कोऑर्डिनेटर डॉ. जावेद आलम खान, पायनियर मांटेसरी की प्रधानाचार्या शर्मिला सिंह, वरदान इंटरनेशनल एकेडमी के प्रबंधक जीवन खन्ना समेत कई स्कूलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
स्कूली वाहन को लेकर संशय बरकरार
स्कूल खोलने को लेकर आपसी सहमति बन रही है, लेकिन स्कूली वाहनों के संचालन को लेकर संशय बरकरार है। डीएम ने निर्देश दिया कि वाहन की क्षमता से आधे बच्चे ही बैठाए जाएं। साथ ही स्कूल का एक स्टाफ अटेंडेंट के रूप में वाहन में रहेगा। स्कूलों को चिंता है कि वाहन में क्षमता से आधे बच्चे बैठाने पर वाहन शुल्क बढ़ाना पड़ेगा, जिसका अभिभावक विरोध करेंगे। वहीं, जिन अभिभावकों ने निजी स्कूली वाहन लगा रखे हैं, उनमें कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन हो रहा है कि नहीं, इसकी देखरेख की जिम्मेदारी कौन लेगा। इस संबंध में विभाग की ओर से अभी तक कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
स्कूल खोले जाने के विरोध में कई
अभी स्कूल खोले जाने के विरोध में अभिभावक संघ समेत कुछ स्कूल भी हैं। एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स दो नवंबर के बाद से स्कूल खोलने की मांग कर चुका है। संगठन ने स्थिति का जायजा लेने की मांग की है। जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोयल भी 15 अक्तूबर से स्कूल खोलने के लिए राजी नहीं हैं। वे अभिभावकों के साथ बैठक कर अगले महीने से ही स्कूल खोलने पर विचार कर रहे हैं। अभिभावक संघ बच्चों की सुरक्षा की मांग को लेकर सरकार से स्कूल खोलने के आदेश को वापस लेने की मांग कर रहा है।
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शिक्षा विभाग में जुटा रहा ब्योरा
शिक्षा विभाग स्कूल खोलने को लेकर दो स्तर से ब्यौरा जुटा रहा है। एक ओर माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सभी अधिकारियों से स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर ब्यौरा मांगा है तो जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने छात्रों और अभिभावकों से सहमति मांगी है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रोफार्मा जारी कर स्कूलों से जानकारी मांगी है कि कक्षा 9 से 12 में कितने छात्र-छात्राएं हैं, स्कूल में सैनिटाइजेशन की व्यवस्था है कि नहीं, मास्क फेंकने के लिए अलग से डस्टबिन है कि नहीं, हाथ धोने के लिए साबुन व सैनिटाइजर है कि नहीं, थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था है या नहीं आदि। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने स्कूलों को गूगल फॉर्म पर लिंक भेजा है, जिसमें छात्रों और अभिभावकों से स्कूल खोले जाने पर सहमति मांगी है। स्कूल इस लिंक को अभिभावकों को भेज रहे हैं।
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