बताया जा रहा है कि उन्होंने दो अप्रैल को प्रचार अभियान शुरू करने का फैसला तय रणनीति के तहत किया है। पिछले साल अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम पर सुप्रीमकोर्ट के फैसले के खिलाफ इसी दिन ‘भारत-बंद’ हुआ था। मायावती ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले को केंद्र सरकार की लचर पैरवी करार दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार पुरानी व्यवस्था बहाल करने का अध्यादेश लेकर आई थी।