दिल्ली में भाजपा की करारी हार से नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को दुनिया भर में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। इससे यूपी में भाजपा के लोग भी निराश व हताश हैं। ये बातें शुक्रवार को बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने यहां पार्टी मुख्यालय में मीडिया से कही।
वह मानती हैं कि दिल्ली में हार की प्रमुख वजह केंद्र की सत्ता में आने पर भाजपा नेताओं का अहंकारी हो जाना है। मायावती ने कहा, दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने साम, दाम, दंड, भेद के हथकंडों के साथ ही पूरी ताकत व संसाधनों का सहारा लिया लेकिन करारी पराजय का सामना करना पड़ा।
इससे सबक सीखने के बजाय भाजपा पुराने तौर-तरीके ही अपना रही है। झारखंड में उसने विधायकों को तोड़ा और अब बिहार में यही षड्यंत्र चल रहा है। यूपी विधान परिषद के चुनाव में भी भाजपा ने एक की जगह दो प्रत्याशी उतारकर जोड़तोड़ से सीट जीतने की कोशिश की लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी।
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में दयनीय स्थिति के लिए भाजपा भी दोषी है। सपा सरकार ने तीन साल में सिर्फ लोकलुभावन घोषणाएं की। उन पर अमल नहीं हुआ, जनता त्रस्त है। यहां जंगलराज व अराजकता खत्म करने के लिए केंद्र सरकार में सपा सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने की इच्छा शक्ति नहीं है।
वहीं केंद्र सांप्रदायिकता व नफरत फैलाने वालों का संरक्षक बना हुआ है। इससे देश में धार्मिक आजादी की छवि को आघात पहुंचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी इस पर सख्त टिप्पणी कर चुके हैं।
‘आप’ का भी भाजपा जैसा ही हाल होगा
मायावती ने कहा कि यूपी में आम आदमी पार्टी का कोई असर नहीं है। कांग्रेस की गलत नीतियों के चलते भाजपा को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत मिला था। अब भाजपा व मोदी के खिलाफ वैसा ही जनमत बनने से दिल्ली में ‘आप’ को शानदार कामयाबी मिली है। दिल्ली में उन्होंने वादे पूरे नहीं किए तो ‘आप’ का हाल भी भाजपा जैसा होगा।
नाम बदलने की संकीर्ण राजनीति
मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं को पहले राजनीतिक द्वेष में बंद करने और फिर नाम बदलकर चालू करने को निंदनीय बताया। प्रदेश की सपा सरकार भी इसी नीति पर चल रही है।
केंद्र व प्रदेश की सरकारों ने दलितों, अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरी में आरक्षण देने के संवैधानिक हक को भी बेअसर कर दिया। उन्होंने कहा, संस्थाओं के नाम बदलने की राजनीति करने के बजाय सपा सरकार को नए संस्थान व नई योजनाएं नए नाम से शुरू करनी चाहिएं।
बसपा ने चुकाई यूपीए को समर्थन की कीमत
तबादलों के कारण आईएएस अफसर नहीं निभा रहे जिम्मेदारी
मायावती ने कहा कि आईएएस अफसरों से विकास की उम्मीद करना बेमानी होगा। आए दिन हो रहे तबादलों के कारण वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। सरकार के मुखिया आईएएस अफसरों की बैठक में घूस लेने के वीडियो का जिक्र करते हैं। जबकि उनके एक मंत्री कहते हैं कि घूस में बड़ा हिस्सा उन्हें दें, छोटा हिस्सा अपने पास रखें।
केंद्र में भाजपा की सरकार बनने से पहले बसपा ने सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए यूपीए सरकार को समर्थन दिया था। मायावती ने कहा कि बसपा को इस समर्थन का नुकसान उठाना पड़ा है। दिल्ली में जनता ने भाजपा को हराने के लिए आम आदमी पार्टी का एकतरफा समर्थन दिया।
बजट सत्र में कड़े होंगे बसपा के तेवर
विधानमंडल के बजट सत्र में बसपा के तेवर सशक्त विपक्षी दल जैसे होंगे। बसपा की राष्ट्रीय स्तर की मान्यता के सवाल पर मायावती ने कहा कि उनका ध्यान अभी वोट प्रतिशत पर नहीं है। इस बारे में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ध्यान दिलाएंगे तो सोचेंगे।