बसपा सुप्रीमो मायावती ने महाराष्ट्र में पुणे के भीमा-कोरेगांव क्षेत्र में हिंसा व उन्माद के मामले में संसद में चर्चा के लिए तैयार न होने पर बीजेपी व केंद्र की मोदी सरकार की कड़ी निंदा की है।
मायावती ने यहां जारी बयान में कहा है कि भीमा-कोरेगांव की हिंसा के संबंध में राज्यसभा में चर्चा कराने की बीएसपी ने मांग की लेकिन सरकार ने नहीं माना। यह साबित करता है कि राज्य व केन्द्र, दोनों बीजेपी सरकारों का रवैया एक जैसा, जातिवादी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि घोर सांप्रदायिक व जातिवादी नेताओं के खिलाफ एफ.आईआर के बावजूद उनकी गिरफ्तारी न होना इस बात को प्रमाणित करता है कि महाराष्ट्र सरकार दोषियों को बचाने व मामले की लीपापोती करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने दलितों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमा दर्ज करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं व मंत्रियों आदि के खिलाफ ऐसी कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है?