फसल सुरक्षा एवं भंडारण के लिए सरकार द्वारा 192 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा को जहां बसपा सुप्रीमो मायावती ने ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ बताया तो कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस पर पलटवार किया। उन्हाेंने कहा कि अपने शासन काल में चीनी मिलें बेचने वाले आज घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं जबकि योगी सरकार लगातार किसान हित में काम कर रही है।
यह कहा है मायावती ने
बसपा सुप्रीमो मायावती ने बृहस्पतिवार को ट्वीट के जरिए कहा है कि किसान समाज वाले विशाल प्रदेश में फसल सुरक्षा व भंडारण के लिए अगले 5 वर्षों में 192 करोड़ अर्थात प्रति वर्ष मात्र करीब 38 करोड़ रुपये खर्च करने की सरकार की ताजा घोषणा ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ के समान है। सरकार इनकी उपेक्षा करना बंद करें। अपनी उपज का लाभकारी मूल्य, गन्ना बकाया नहीं मिल पाने से यूपी के किसान काफी दुखी और परेशान हैं । कमजोर मानसून ने उनके चिंताएं और बढ़ा दी हैं। किसानों को ऐसी विकट स्थिति से निकालने के लिए सरकार हर स्तर पर उनकी मदद तत्काल शुरू करे।
शाही का पलटवार
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि भाजपा सरकार ने 192 करोड़ से ज्यादा की धनराशि दी जबकि मायावती सरकार ने वर्ष 2007 से लेकर 2012 तक के अपने कार्यकाल में फसल सुरक्षा भंडारण के लिए 123 करोड़ रुपये जारी किए। यानी हर साल केवल 24 करोड़ रुपये। भाजपा सरकार की राशि इससे 56 प्रतिशत ज्यादा है। अपने शासन काल में 24 चीनी मिलें बंद करके औने-पौने दाम पर मिलों को बेचने वाले आज घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। कहा कि डबल इंजन वाली सरकार से किसानों को मिल रही संतुष्टि के कारण विपक्षी दलों में बेचैनी और हताशा है। इसी वजह से ट्विटर पर ये लोग अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। शाही ने गन्ना भुगतान से लेकर किसान हित की चल रही अन्य योजनाओं के बारे में बताया।
यूपी सरकार ने इस निर्णय को कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत विभिन्न पारिस्थितिकीय संसाधनों द्वारा खेत में खड़ी फसल, तैयार उपज के सुरक्षित भंडारण के लिए कीट एवं रोग नियंत्रण योजना को हरी झंडी दी गई थी। इस योजना में सरकार अगले पांच वर्षों के लिए 192 करोड़ 57 लाख 75 हजार रुपये खर्च करेगी। किसानों को रासायनिक एवं जैविक कीट रसायन रक्षा इकाई से अनुदान पर दिया जाएगा। वहीं फसलों को सुरक्षित रखने के लिए बखारी पर 50 प्रतिशत अनुदान देने का प्रस्ताव पास किया गया था।