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'अखिलेश को बर्दाश्त नहीं सच, तो छोड़ दें कुर्सी'

Mon, 29 Jul 2013 10:29 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर जनता को गुमराह करने के लिए झूठ बोलने का आरोप लगाया और सपा सरकार को घोर जातिवादी मानसिकता वाली बताया।
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मायावती ने दलित संतों, महापुरुषों के स्मारकों और संग्रहालयों के निर्माण को फिजूलखर्ची बताने की कड़ी भर्त्सना की।

पत्रकार वार्ता में मायावती ने कहा कि सपा एक साजिश के तहत झूठा प्रचार कर रही है कि बसपा सरकार ने कोई मेडिकल कॉलेज नहीं बनाया।

माया ने कहा, 'दलित महापुरुषों के स्मारक, पार्क काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। सरकार को इनके टिकट से अच्छी आय हो रही है। ये पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होते जा रहे हैं। समाज में दबे-कुचले लोगों के लिए ये श्रद्धास्थल हैं। इस पर खर्च को फिजूलखर्ची करार देना राजनीतिक दुर्भावना का प्रमाण है।'

बसपा सरकार में कन्नौज, जालौन व सहारनपुर में मेडिकल कॉलेज, झांसी में पैरा मेडिकल कॉलेज, फैजाबाद व मिर्जापुर मंडल मुख्यालय पर अतिविशिष्ट सुविधा वाले चिकित्सालय व निजी क्षेत्र के सहयोग से लखनऊ, आगरा, बिजनौर, आजमगढ़, अंबेडकरनगर व सहारनपुर में सुपर-स्पेशियलिटी वाले अस्पताल खोलने जैसे काम किए गए।
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नोएडा के जिला अस्पताल के उच्चीकरण और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा एक नया अस्पताल स्थापित करके 200-200 बेड के दो उच्चस्तरीय डॉ. भीमराव अंबेडकर मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू कराने का काम किया।

मगर अब सपा सरकार इसका वैसे ही श्रेय लेने की कोशिश कर रही है जैसे दिल्ली से आगरा तक अत्याधुनिक यमुना एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करके लेने की कोशिश की थी।

उन्होंने बीएसपी के भाईचारे में जातिवाद को बढ़ावा देने के सपा के आरोप की आलोचना करते हुए कहा कि यह सपा की घोर जातिवादी मानसिकता व राजनीति से प्रेरित बयान है।

उन्होंने ब्राह्मणों ने जिस तरह इस भाईचारे को मजबूती दी है, उससे सपा की बेचैनी बढ़ गई है।

'सच बर्दाश्त नहीं कर पा रहे तो कुर्सी छोड़ें'
इधर, बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रदेश की कानून-व्यवस्था का सच बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है तो उन्हें पद से खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए।

मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री यदि कानून-व्यवस्था के आरोप से बचना चाहते हैं तो फिर उन्हें प्रदेश के गुंडों, बदमाशों और आपराधिक तत्वों को सलाखों के पीछे भेजना होगा। जब तक वह ऐसा नहीं करते बसपा सूबे में राष्ट्रपति शासन की मांग करती रहेगी।
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