लोकसभा चुनाव में सपा ने 4 और बसपा ने 6 मुस्लिमों को टिकट दिए थे। दोनों दलों के तीन-तीन सांसद विजयी रहे। चुनाव में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन मुसलमानों की पहली पसंद रहा।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश से कोई भी मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया था।
कैराना लोकसभा सीट पर 2018 में हुए उपचुनाव में रालोद की तबस्सुम हसन सांसद चुनी गई थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा ने मुस्लिम बहुल चार सीटों कैराना, मुरादाबाद, संभल व रामपुर से मुस्लिम प्रत्याशी उतारे। इनमें कैराना को छोड़कर शेष तीन सीटों पर सपा के मुस्लिम सांसद चुने गए।
वहीं, बसपा ने 6 लोकसभा सीटों सहारनपुर, मेरठ, अमरोहा, धौरहरा, डुमरियागंज और गाजीपुर से मुस्लिम उम्मीदवार उतारे। इनमें सहारनपुर, अमरोहा व गाजीपुर से बसपा के मुस्लिम सांसद विजयी हुए। इस तरह सपा-बसपा गठबंधन ने कुल 10 सीटों पर मुस्लिमों को टिकट दिए जिनमें 6 विजयी रहे। इनमें पांच पश्चिमी यूपी और एक पूर्वांचल से हैं। इस तरह गठबंधन में सबसे ज्यादा सफलता दर मुस्लिम उम्मीदवारों की रही।
मायावती ने पहले कहा था कि विस उपचुनाव अलग लड़ने के बावजूद सपा से गठबंधन के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। पर, रविवार को उन्होंने जिस तरह अखिलेश पर हार का ठीकरा फोड़ा, वह पूरी तरह राहें अलग होने का संदेश है।