बाबा साहब के परिनिर्वाण दिवस पर मंगलवार को बसपा सुप्रीमो मायावती करीब 11 बजे पहुंचीं। उनके पहुंचते ही समर्थकों ने ‘बाबा साहब जिंदाबाद’ और बहन जी आप संघर्ष करो के नारे लगाने शुरू किए। मायावती ने संबोधन की शुरुआत में लोगों को भारी संख्या में जुटने पर धन्यवाद दिया। बाबा साहब को श्रद्धांजलि देने के बाद मायावती सीधे सपा सरकार पर हमलावर हो गईं।
मायावती ने कहा, केवल लखनऊ मंडल से लाखों संख्या में पहुंचे लोगों का आभार प्रकट करती हूं। हालांकि आप लोगों को मालूम है कि पिछले साल या पहले जब भी छह दिसंबर को प्रोग्राम होता था तो तब पूरे प्रदेश भर के लोग शामिल होते थे।
लेकिन प्रदेश में सपा के षडयंत्र के तहत 9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर जो अप्रिय घटना घटी है उसको ध्यान में रखते हुए पार्टी ने इस बार पूरे प्रदेश से लोगों को लखनऊ बुलाने के बजाय हर विधानसभा क्षेत्र में श्रद्धांजलि दी जाएगी।
मायावती ने अपने और सभी अनुयाइयों की तरफ से बाबा साहब को श्रद्धासुमन अर्पित किए इसके बाद सपा सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जानबूझकर नासमझ बने सपा मुखिया मुलायम सिंह और उनके बबुआ ने सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक क्षेत्र में जो जगह बनाई है वो पूरी कि पूरी देन बाबा साहब की है वर्ना ये सभी लोग आज किसी न किसी की गुलामी कर रहे होते। ये अहसानफरोश हैं जो हमारी सरकार में लगाई गईं संतों और महापुरुषों की मूर्तियों के बारे में आए दिन शैतानी भरे लहजे में काफी बेहूदी भाषा का इस्तेमाल करते रहते हैं।
मुख्यमंत्री का नाम न लेते हुए मायावती ने कहा, सपा सरकार का वर्तमान मुखिया बेहूदी बात करता रहता है। प्रदेश में लखनऊ का बड़ा जिक्र करता है कि यहां लगे पत्थर फिजूलखर्ची है। वह अक्सर कहता है कि जो हाथी जहां खड़े किए गए थे वहीं खड़े हैं। ये बबुआ आगे चलेगा पूरे देश में लगी महापुरुषों की मूर्तियों के बारे में बेकार की बातें कर सकता है।
मायावती ने कहा कि वर्तमान में केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा कई सौ करोड़ रुपयों की लागत से बन रही सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति के बारे में भी ऐसा कह सकता है। जबकि सरकार के मुखिया को ऐसी अर्थहीन बातें करने से पहले खुद गिरेबान में झांककर देख लेना चाहिए कि लोहिया स्थल जिसका द्वेष की भावना से नाम बदलकर जनेश्वर मिश्र कर दिया, क्या वहां की मूर्तियां खड़ी नहीं रहती हैं या फिर बीच-बीच में अपना स्थान बदलती रहती हैं।