उन्होंने कहा कि सपा से गठबंधन बड़े लक्ष्य के साथ किया गया था लेकिन दु:ख की बात है कि इसमें कोई खास सफ लता नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि सपा के लोगों में काफ ी सुधार लाने की जरूरत है। उन्हें बसपा के कैडर की तरह ही किसी भी हाल में तैयार करना चाहिए। बीजेपी की जातिवादी, सांप्रदायिक व जनविरोधी नीतियों से मुक्ति दिलाने के लिए काफी कठोर संघर्ष करते रहने की जरूरत है जिसका एक अच्छा मौका सपा के लोगों ने इस चुनाव में गवां दिया है।
मायावती ने कहा कि यदि आगे मुझे लगेगा कि सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों को करने के साथ-साथ अपने लोगों को मिशनरी बनाने में कामयाब हो जाते हैं, तो फिर हम लोग जरूर आगे भी मिलकर साथ में चलेंगे। अर्थात, अभी हमारा कोई ‘ब्रेकअप’ नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर वे किसी कारणवश इस काम में सफ ल नहीं हो पाते हैं, तो फि र हम लोगों का अकेले ही चलना ज़्यादा बेहतर होगा। इसीलिए वर्तमान स्थिति में बसपा ने उपचुनावों में अकेले ही यह चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।
मायावती ने कहा कि जबसे बसपा व सपा का गठबंधन हुआ है तबसे सपा प्रमुख अखिलेश यादव व उनकी पत्नी डिंपल यादव पूरे दिल से व पूरे आदर-सम्मान से अपना बड़ा व आदर्श मानकर मेरी बहुत इज़्जत करते हैं। मैंने भी उनको अपने सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाकर अपने बड़े होने के नाते उसी हिसाब से उनको अपने ख़ुद के परिवार की तरह ही पूरा-पूरा आदर-सम्मान दिया है।
मायावती ने कहा कि ये रिश्ते केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ही नहीं बने हैं बल्कि ये रिश्ते आगे भी हर सुख-दु:ख की घड़ी में हमेशा ऐसे ही बने रहेंगे। हमारे ये रिश्ते अब कभी भी खत्म होने वाले नहीं हैं। मेरी तरफ से हमेशा इसकी कोशिश बनी रहेगी। मायावती ने सपा मुखिया के परिजनों की हार पर चिंता जताते हुए कहा कि चुनाव परिणाम में ईवीएम की भी भूमिका खराब रही है, लेकिन इनकी हार का बसपा को बहुत दु:ख है।