सूत्रों की मानें तो पार्टी को अपने तौर-तरीकों से चलाने की आकाश की मुहिम को लेकर बीते कई दिनों से अंदरखाने नाराजगी बढ़ती जा रही थी। जो अहम फैसले मायावती के नजदीकी पदाधिकारी लेते थे, उनमें आकाश सीधे हस्तक्षेप करने लगे थे।
आसान नहीं आगे की राह
आकाश के निष्कासन के बाद अब उनकी आगे की राह आसान नहीं है। उनके पास पहला विकल्प अलग संगठन बनाना है। दूसरा विकल्प मायावती की नाराजगी कम होने का इंतजार करना है। हालांकि जिस तरह राजनीति में पर्दापण के बाद आकाश युवाओं की पसंद बनते चले गए, यह भविष्य में बसपा के लिए दिक्कत का सबब बन सकता है।