उल्लेखनीय है कि गेस्ट हाउस कांड के लिए मायावती तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को हमेशा जिम्मेदार ठहराती रही हैं। इससे साफ है कि मायावती ने पिछले लोकसभा चुनाव में एक भी सीट न मिलने से खड़ी गंभीर चुनौती से पार पाने की सियासी मजबूरियों के लिए सपा से हाथ जरूर मिलाया, लेकिन अपने साथ हुए हादसे को वह अभी भी मन से पूरी तरह निकाल नहीं पाई हैं।
डॉ. आंबेडकर व डॉ. लोहिया ने 1956 में एक दूसरे को पत्र लिखकर तय किया था कि वह सामाजिक न्याय की लड़ाई मिलकर लड़ेंगे। पर दिसंबर 1956 में बाबा साहब का देहांत हो जाने की वजह से ऐसा नहीं हो सका। डॉ. आंबेडकर का कहना था कि अगर समाजवादी, समाजवाद के स्वप्न को साकार करना चाहते हैं तो उन्हें स्वीकार करना होगा कि जाति का प्रश्न एक मूलभूत प्रश्न है। जब तक जाति रूपी राक्षस को मारा नहीं जाएगा तब तक न तो राजनीतिक सुधार हो सकता है और ना ही आर्थिक सुधार। दूसरी तरफ डॉ. लोहिया ने आंबेडकर के तर्क को और आगे ले जाते हुए समाजवादियों की भ्रांतियों और उनके तर्क में दोषों की पहचान की। डॉ. लोहिया के अनुसार जो लोग केवल राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की बात करते हैं और सामाजिक सुधारों के महत्व को नजरंदाज करते हैं, वे निहित स्वार्थों से प्रेरित हैं क्योंकि राजनीतिक और आर्थिक क्रांति के बाद भी सामाजिक रूप से दबे, कुचले और पिछड़े लोगों के जीवन मे कोई अंतर नही आएगा।