अल्पसंख्यकों को 85 सरकारी योजनाओं में 20 फीसदी कोटा दिए जाने के फैसले को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा, मुस्लिम समाज के लोगों को बरगलाने और गुमराह करने के साथ ही भाजपा को भड़काकर सांप्रदायिक माहौल तैयार करके आपसी चुनावी लाभ की नीयत से यह फैसला किया गया है।
इस फैसले के पीछे सपा की नीयत में खोट व खुराफात लगती है। उन्होंने आबादी के आधार पर मुसलमानों को अलग से आरक्षण दिए जाने के चुनावी वादे से मुकरने का आरोप भी सपा पर लगाया।
मायावती ने कहा, सपा ने विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में वादा किया था कि मुसलमानों को दलितों की तरह जनसंख्या के आधार पर अलग से आरक्षण दिया जाएगा।
करीब डेढ़ साल का बीतने को हैं लेकिन अब तक इसके बाबत कार्यवाही तक शुरू नहीं की गई। मुस्लिम बहुल जिलों में नए सरकारी शैक्षिक संस्थानों की स्थापना के चुनावी घोषणा पत्र के वादे पर भी रत्ती बराबर अमल नहीं हुआ।
इतना ही नहीं बसपा सरकार में स्थापित उर्दू-अरबी-फारसी विश्वविद्यालय को विशेष कानूनी अधिकार देकर अल्पसंख्यक तालीमी इदारों को प्रोत्साहित व मान्यता के लिए खास जिम्मेदारी दी गई थी। इस संबंध में भी सपा सरकार ने अभी तक कुछ नहीं किया।
बजट पेश करते समय लेना था फैसला
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि सपा सरकार अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिम हितों के संरक्षण व कल्याण के प्रति बिल्कुल गंभीर नहीं है। मामूली महत्व और कम बजट वाली 85 सरकारी योजनाओं में 20 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने का फैसला तो बजट पेश करते समय ही ले लेना चाहिए था, ताकि चालू वित्तीय वर्ष में उन्हें कुछ लाभ मिल सकता।
नाकामी छिपाने की कोशिश
उन्होंने कहा, सपा सरकार ने हर क्षेत्र में नाकामी छिपाने और जनता का ध्यान बांटने की नाकाम कोशिश की है। अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था के साथ-साथ सांप्रदायिक दंगों व तनाव के कारण सर्वसमाज और मुस्लिम समाज के लोगों की नाराजगी जग-जाहिर है। उन्हें सपा सरकार को कड़ा सबक सिखाने के लिए सही मौके का ही इंतजार है।