दोनों दलों केअध्यक्षों ने एक संयुक्त बयान भी जारी किया। इसमें गठबंधन के एलान के साथ यह भी कहा गया है कि मायावती के नेतृत्व में समान विचारधारा के अन्य दलों को भी सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देकर गठबंधन का स्वरूप बढ़ाया जाएगा। इससे दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर ढाई करोड़ छत्तीसगढ़वासियों की आवाज बुलंदी से उठाई जा सकेगी।
बसपा ने छत्तीसगढ़ में गठबंधन कर चुनाव लड़ने का एलान किया है लकिन मध्य प्रदेश व राजस्थान में वह अकेले ही चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर तो इन दोनों राज्यों के बारे में अभी चुनाव की रणनीति का एलान नहीं किया है। लेकिन, संकेत है कि बसपा इन दोनों राज्यों में अकेले चुनाव लड़ेगी। मायावती भाजपा के साथ कांग्रेस पर भी जिस तरह आक्रामक हमले कर रही हैं, उससे कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ बसपा के चुनाव लड़ने के संकेत नहीं हैं।
मायावती द्वारा छत्तीसगढ़ में गठबंधन कर चुनाव लड़ने के एलान के लिए लखनऊ को चुने जाने के सियासी निहितार्थ तलाशे जा रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर दिल्ली में कई दौर की वार्ता हो चुकी थी। वह चाहतीं तो बड़ा संदेश देने के लिए छत्तीसगढ़ जाकर गठबंधन का एलान कर सकती थीं।
इसका गठबंधन को ज्यादा मनोवैज्ञानिक फायदा मिल सकता था। मगर, अपनी शर्तों पर ही सियासत करने वाली मायावती तय रणनीति के तहत लखनऊ लौटीं और छत्तीसगढ़ के चुनाव के लिए गठबंधन का एलान यहां से किया। इसके अलावा वह लगातार सम्मानजनक सीटों की बात दुहरा रही हैं। माना जा रहा है कि यूपी में गठबंधन को सीटों पर मामला फंस गया है और मायावती लगातार यह संदेश दे रही हैं कि वह ज्यादा झुकने वाली नहीं हैं।
अजीत जोगी ने कहा कि बीजेपी 15 वर्षों से सत्ता में है। वे सत्ता, पैसा, प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर फिर से सत्ता में आना चाहते हैं। अब यह बसपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे का गठबंधन हो गया है। मायावती जी और हम मिलकर भाजपा को अवश्य रोक लेंगे।