छह हजार में से 619 बच्चे ऐसे थे जो दूसरे स्कूल में पढ़ते पाए गए। इनमें से अधिकतर बच्चे निजी विद्यालय में पढ़ते पाए गए, वहीं कुछ पहले पढ़ चुके थे। बीएसए ने बताया कि आरटीई के अंतर्गत उन बच्चों को दाखिला दिया जाता है जिन्होंने स्कूल में प्रवेश न लिया हो।
इसके अलावा 146 ऐसे बच्चों का दाखिला निरस्त कर दिया गया, जिनके अभिभावकों ने आवंटित स्कूलों में दाखिला दिलाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इनमें से ज्यादातर ने स्कूल की दूरी ज्यादा होने से दाखिला कराने से मना कर दिया तो कुछ को स्कूल पसंद नहीं था। हालांकि आवेदन के समय स्कूलों का विकल्प उन्होंने ही दिया था।
इनके अलावा 99 ऐसे बच्चों का दाखिला निरस्त कर दिया गया जिनके अभिभावकों ने अपने वार्ड से इतर स्कूलों के लिए आवेदन किया था। पांच बच्चों के दाखिले उनकी आयु में भिन्नता की वजह से निरस्त किए गए। सत्यापन बाद बीएसए ने दाखिले के लिए जिन एक हजार बच्चों की नई सूची जारी की है उसमें बच्चों के आवंटित स्कूल बदल दिए गए हैं।
पहले जो स्कूल आवंटित किए गए थे उसे निरस्त कर दूसरे स्कूल दिए गए हैं। दरअसल बेसिक शिक्षा कार्यालय ने स्कूलों की सूची बनाते समय काफी गड़बड़ियां की थीं। वार्ड वाइज मैपिंग में कई स्कूलों के वार्ड बदल दिए गए थे, कई स्कूलों के नाम गलत लिखे थे तो कई अल्पसंख्यक वर्ग के स्कूल भी आवंटित कर दिए गए थे।
इससे इन बच्चों का दाखिला नहीं हो पाया। आरटीई के तहत बचे पात्र एक हजार बच्चों का दाखिला गुरुवार को कराया जाएगा।बीएसए ने बताया कि विभाग के अधिकारी अभिभावकों संग मिलकर स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराएंगे। इसके लिए अभिभावकों को आवंटित स्कूलों पर सुबह 8 बजे से दो बजे तक उपस्थित रहने को कहा गया है।