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सीएम अखिलेश मुझे बुआजी कहते हैं, बुआ के सम्मान में दयाशंकर को गिरफ्तार करें: मायावती

Sun, 24 Jul 2016 08:32 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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बसपा सुप्रीमो मायावती - फोटो : amar ujala
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जब उन्हें बुआ कहते हैं तो उन्हें बुआ के मान-सम्मान के लिए उनके दोषी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
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मुख्यमंत्री ने उन्हें कई बार सार्वजनिक रूप से बुआ कह कर सम्मानित किया है। वह कई बार कह चुके हैं कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव उन्हें अपनी बहन कहते हैं।

जब वह मुलायम की बहन और उनकी बुआ हैं तो फिर मुख्यमंत्री को भाजपा के दबाव में आए बिना अपनी बुआ के मान-सम्मान के लिए दोषी दयाशंकर के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सजा दिलवानी चाहिए।
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उन्होंने कहा, यदि मुख्यमंत्री ने भाजपा के दबाव में ऐसा नहीं किया तो वह सत्ता में आने पर दयाशंकर के खिलाफ समयबद्ध निष्पक्ष जांच कराके सख्त कार्रवाई करेंगी। साथ ही सपा सरकार के कार्यकाल में अन्याय के जितने भी मामले दबाए गए हैं सबकी जांच कराके कार्रवाई होगी।

'भाजपा के केंद्र में आते ही देश भर में बढ़ा है दलित उत्पीड़न'

मायावती ने दयाशंकर की अपमानजनक टिप्पणी पर राज्यसभा में दिए अपने बयान पर एफआईआर दर्ज करने पर भी सवाल उठाया। कहा, संसद में कही गई बात पर एफआईआर दर्ज कराना कानून का उल्लंघन है।

हर पुलिस अधिकारी को पता है कि संविधान की धारा 105 के अंतर्गत हर सांसद को अपनी बात कहने की आजादी है। इसी धारा के सेक्शन दो में कहा गया है कि संसद में कही गई किसी बात को लेकर किसी न्यायालय में कार्रवाई नहीं की जा सकती।

भाजपा से मिलीभगत की वजह से सपा सरकार ने पुलिस दबाव बनवाकर मामला दर्ज करा दिया। यह संसद की अवमानना है। इसी तरह उनके नेताओं के खिलाफ भी मनमाने तरीके से एफआईआर दर्ज कराई गई है।

अपने नेताओं का किया बचाव

मायावती ने न सिर्फ दयाशंकर मामले पर राज्यसभा में की गई अपनी टिप्पणियों का बचाव किया बल्कि अपने नेताओं के साथ भी खड़े होने का संदेश दिया।

उन्होंने लखनऊ में आंदोलन के दौरान अमर्यादित पोस्टर लहराने और दयाशंकर की मां व बेटी को लक्ष्य कर की गई आपत्तिजनक नारेबाजी पर सवाल उठाने वालों को दूषित मानसिकता वाला बताया। कहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी नारे व शब्द को लेकर पहले ही बात स्पष्ट कर चुके हैं। धरना-प्रदर्शन में कोई अपशब्द नहीं कहा गया।

दलित वोटों का नुकसान पचा नहीं पा रही भाजपा
मायावती ने कहा, भाजपा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलित वोटों में सेंध लगाने के लिए सत्ता में आने के बाद से ही जो प्रयास किए थे, रोहित वेमुला से लेकर गुजरात के ऊना तक की घटनाओं से उसकी पोल खुल चुकी है। भाजपा दलित वोटों के नुकसान को पचा नहीं पा रही है।

दलितों का ध्यान इन घटनाओं से हटाने के लिए भाजपा ने दयाशंकर को जानबूझकर सामने कर दिया। तमाम लोगों की आस्था व अभिमान की खास प्रतीक के  खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कराया। यह भाजपा के गले पड़ गया। वह स्वयं ऊना जाना चाहती थीं लेकिन यूपी की इस घटना ने उन्हें यहां आने पर मजबूर कर दिया।
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अच्छा होता दयाशंकर की मां अपने बेटे पर भी एफआईआर दर्ज करातीं

मायावती ने कहा,दयाशंकर की मां और पत्नी बसपा नेताओं के बयान से इतनी आहत हुईं कि उनके व उनके नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दिया।

अच्छा होता यदि दयाशंकर की मां ने जिस तरह अपनी पोती व बहू के आत्मसम्मान में शिकायत की वैसी ही शिकायत उनके अपमान के खिलाफ अपने बेटे पर भी दर्ज करातीं। ऐसा करने पर पूरे देश की माताएं उनके साथ हो जातीं।

इस प्रेस कांफ्रेंस मे बसपा सुप्रीमो ने यूपी चुनाव को लेकर अपनी पार्टी की रणनीति भी तय कर दी। उन्होंने कहा कि अब 25 जुलाई को बसपा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन नहीं होगा। बल्कि 21 अगस्त को वो खुद आगरा में एक महारैली को सम्बोधित करेंगी।

इसके बाद 28 अगस्त को वो पूर्वांचल के आजमगढ़ में एक महारैली को सम्बोधित करेंगी। मायावती ने बताया कि रैली का विषय 'सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय' रखा गया है और इसके आगे भी रैलियां आयोजित की जाती रहेंगी।

मायावती ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि जब चुनाव आ रहे हैं तो उन्हें यूपी की याद आ रही है। गोरखपुर में उन्होंने खाद कारखाने व एम्स का शिलान्यास किया। कायदे से तो केंद्र में उनकी सरकार बनते ही ऐसा हो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब चुनाव आ गए तो वो यूपी की बात कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी में सपा व भाजपा की मिलीभगत है। सपा सरकार भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। इन दोनों पार्टियों का मकसद सपा को फिर से सत्ता में आने से रोकना है। बसपा इनकी मिलीभगत का पर्दाफाश करेगी।
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