बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा, केंद्र की मौजूदा भाजपा सरकार सीबीआई का दुरुपयोग करके उन्हें जबरन एनआरएचएम घोटाले में फंसाने में लगी हुई है, जबकि ताज मामले की तरह इससे भी उनका कोई लेना-देना नहीं रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा- ‘विरोधी पार्टियां व जातिवादी ताकतें मेरी राह में कितनी भी रुकावटें क्यों न पैदा करें, मैं बीएसपी के मूवमेंट व मिशन से रत्तीभर भी कदम पीछे खींचने वाली नहीं हूं।
विरोधी पार्टियां मिलकर मुझे फांसी के फंदे पर भी क्यों न लटकवा दें, मैं संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अधूरे पड़े कारवां व मिशन को मंजिल तक पहुंचाने के लिए अपनी आखिरी सांस तक मैदान में डटी रहूंगी।’
विज्ञापन
मायावती ने कहा कि यदि दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्ग का आरक्षण खत्म करने की कोशिश की गई तो वे पूरे देश में जनांदोलन छेड़ देंगी। उन्होंने सपा और भाजपा में मिलीभगत का आरोप लगाते हुए प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की।
मायावती शुक्रवार को कांशीराम ईको गार्डन में बसपा के संस्थापक कांशीराम के नौवें परिनिर्वाण दिवस पर कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर के अथक प्रयासों के बाद दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों को शिक्षा, नौकरी और राजनीति में आरक्षण मिला था। अब समीक्षा के नाम पर आरक्षण खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं।
'प्रधानमंत्री मोदी का चुप रहना इसका सबूत'
मायावती ने कहा कि आरएसएस मुखिया की आरक्षण की समीक्षा की बात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुप रहना इसका सुबूत है। उन्होंने कहा, भाजपा, संघ और उसके सहयोगी संगठन आरक्षण खत्म करने का प्रयास करेंगे तो पूरे देश में जनांदोलन शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भाजपा सरकार से सचेत रहने और जनांदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि जब से यूपी में सपा और केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी है, प्रदेश में कट्टरपंथी व सांप्रदायिक ताकतें पहले से ज्यादा मजबूत हुई हैं। उनके निशाने पर अल्पसंख्यक, खास तौर से मुसलमान हैं। वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भाजपा नेता, मंत्री और सांसद अपने बयानों से संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। भाजपा सरकार बनने के बाद से देश के कई बड़े लेखक मारे जा चुके हैं।
इन मामलों में कार्रवाई न होने से दुखी होकर कुछ साहित्यकारों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए हैं। उन्होंने कहा, प्रदेश में गुंडों, बदमाशों, माफिया का आतंक है, सपा का जंगलराज चल रहा है, अराजकता का माहौल है।
दादरी कांड की आग ठंडी नहीं हुई कि नोएडा में दलित समाज के पीड़ितों को कपड़े उतारकर प्रदर्शन को मजबूर होना पड़ रहा है। आम जनता में सपा सरकार के खिलाफ जबर्दस्त गुस्सा है। विधानसभा चुनाव में लोग सपा को सत्ता से बाहर करके बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार लाना चाहते हैं?
पीएम का बयान मजबूरी में
मायावती ने कहा कि देश के हालात से दुखी व चिंतित होकर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति अपनी पीड़ा जाहिर करने को विवश हुए। प्रधानमंत्री ने मजबूरी में राष्ट्रपति के बयान का समर्थन किया है।
मुलायम के कोरे बयान से क्या होगा? बसपा सुप्रीमो ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने दादरी कांड को साजिश का नतीजा बताया है। उनके कोरे बयान से ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। दादरी की साजिश रचने वालों पर सपा सरकार कानूनी कार्रवाई नहीं कर रही।
बसपा सरकार में करेंगे गुलाम अली का सम्मान मायावती ने दुख जताया कि महाराष्ट्र में सांप्रदायिक ताकतों ने गुलाम अली के कार्यक्रम नहीं होने दिए। उन्होंने कहा कि यूपी में बसपा सरकार बनने पर गुलाम अली को बुलाकर उनका सम्मान किया जाएगा।
दलितों, पिछड़ों को शूद्र बनाना चाहती है भाजपा बसपा सुप्रीमो ने कहा कि दलित, आदिवासी और पिछड़ों के हित हिंदू राष्ट्र में सुरक्षित नहीं रह सकते। हिंदू राष्ट्र बना तो वर्ण व्यवस्था के आधार पर दलितों, पिछड़ों को शूद्र की श्रेणी में शामिल करके उन्हें गुलाम और लाचार बना दिया जाएगा। भाजपा, आरएसएस की मंशा को बसपा सफल नहीं होने देगी।
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में अपनी खराब स्थिति से सपा और भाजपा चिंतित हैं। उन्होंने सत्ता के लिए हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं। भाजपा ने मुसलमान वोटों के बंटवारे के लिए हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को सक्रिय कर दिया है। भाजपा पीस पार्टी का भी सहारा ले सकती है।
सपा सरकार में मुआवजे में पक्षपात मायावती ने कहा कि सपा सरकार में जाति, धर्म के आधार पर मुआवजे में पक्षपात किया जाता है। बसपा, यादव समाज के खिलाफ नहीं है, लेकिन दलितों, पिछड़ों, मुस्लिमों और अपर कास्ट के गरीब लोगों को गुंडे, माफिया मार देते हैं तो भी मुआवजा और नौकरी नहीं मिलती।
दादरी कांड के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए तब लखनऊ बुलाया गया जब पूरे देश का मीडिया और राजनीतिक लोग बिसाहड़ा पहुंच गए। जब बसपा ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी की अगुवाई में 11 लाख रुपये का चेक देने के लिए पीड़ित परिवार के पास डेलीगेशन भेजा।