लखनऊ। दूरसंचार विभाग ने मोबाइल सिम और फोन से जुड़ी धोखाधड़ी और साइबर अपराध रोकने के लिए उपभोक्ताओं से जागरूक रहने की अपील की है। विभाग के लाइसेंस सेवा क्षेत्र विंग ने 449 फर्जी सिम विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट भी किया है। साथ ही बताया है कि एक आईडी पर अधिकतम नौ सिम कार्ड हो सकते हैं। ग्राहक संचार पोर्टल पर अपने नाम के फर्जी सिम बंद करा सकते हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाइसेंस सेवा क्षेत्र के अपर महानिदेशक अरुण कुमार वर्मा ने मंगलवार को जीपीओ स्थित कार्यालय में प्रेसवार्ता कर बताया कि दिसंबर 2024 से अब तक 693 संदिग्ध विक्रेताओं की पहचान हुई है। पुख्ता सबूतों के आधार पर 449 फर्जी विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट किया गया है। इनमें भारती एयरटेल के 185, बीएसएनएल के 23, रिलायंस जियो के 44, वोडाफोन आइडिया के 197 विक्रेता हैं। ये विक्रेता पैसे का लालच देकर गलत आईडी पर सिम चालू करते थे। यही नहीं, असली ग्राहकों को धोखे में रखकर उनके आईडी पर अतिरिक्त सिम जारी करते थे। जाली दस्तावेजों के जरिये सिम बेचना भी इनके कारनामों में शामिल था।
एक आदमी ने ले रखे थे 450 कनेक्शन
अपर महानिदेशक ने बताया कि मोबाइल दुकानों के बाहर सिम बेचने वाले कई लोग संदिग्ध पाए गए। 2023 से इनका पुलिस वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी से जांच में एक व्यक्ति ने 450 कनेक्शन ले रखे थे। कुछ तकनीकी लोग अनधिकृत रूप से मोबाइल की आईएमईआई बदल देते हैं। यह संज्ञेय अपराध है, जिस पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या तीन साल तक की कैद हो सकती है।
जब कोई पैसे मांगे तो काटकर मिलाएं फोन
धोखाधड़ी वाले कॉल फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए सिम से आते हैं। ठग कई बार परिचित बनकर बात करते हैं, परिचित का नंबर भी स्क्रीन पर आता है। ऐसे में अगर कोई फोन कर पैसे मांगे, तो फोन काटकर उसी नंबर पर वापस फोन लगाएं। इससे वास्तविक परिचित को फोन लगेगा और मामले का पर्दाफाश हो जाएगा।