‘विश्व के सर्वाधिक सड़क हादसे भारत में होते हैं। वर्ष 2012 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर मिनट एक सड़क हादसा होता है और हर 3.7 मिनट में एक व्यक्ति की मौत होती है।
निश्चित तौर पर यह एक ऐसा खिताब है जिसे न कोई भारतवासी हासिल करना चाहेगा न खुश होगा।’
हजरतगंज स्थित एक होटल में विश्व बैंक द्वारा आयोजित मल्टी सेक्टर रोड सेफ्टी वर्कशॉप में वाह्य सहायतित परियोजना विभाग के सलाहकार मधुकर जेटली ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों में कमी लाने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा।
वर्कशॉप में सड़क का इस्तेमाल करने से लेकर सड़क बनाने वालों और यातायात, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं के एकजुट होकर काम करने से सड़क हादसों में 50 प्रतिशत कमी आने की बात कही गई।
मधुकर जेटली ने कहा कि भारत में सड़क हादसों के आंकड़े बेहद चिंता जनक हैं। भारत विश्व के अन्य देशों में होने वाले सड़क हादसों में सबसे ऊपर है। यहां रोज 440 आदमी जान गंवाते हैं।
जबकि यूपी में प्रति वर्ष 20,000 से ज्यादा मौतें होती हैं। जेटली ने कहा कि यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली ने वर्ष 2011 से 2020 को रोड सेफ्टी दशक घोषित किया है।
इसके एक्शन प्लान के तौर पर हमने पांच सूत्री कार्यक्रम तय किया है जिससे सड़क हादसों में कमी लाने के साथ ही सड़क सुरक्षा के उच्च स्तरीय मानक स्थापित करने में सहयोग मिलेगा।
उन्होंने एक विदेशी तीर्थयात्री का जिक्र करते हुए कहा कि उसने वाराणसी को एक ऐसा शहर बताया था जहां लोग एक-दूसरे पर चढ़े आते हैं।
ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रजनीश गुप्ता ने ट्रैफिक सिस्टम सुधारने के लिए अलग से फंड बनाने की बात कही। वहीं विश्व बैंक के दिपन बसु और अरनब बंदोपाध्याय ने कहाकि जब लोग जागरूक होंगे तो सड़क हादसों में कमी आएगी।
रोड सेफ्टी मैनेजमेंट कंसलटेंट टोनी ब्लिस ने रोड सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम और एरिक हॉवर्ड ने समन्वय की चुनौतियों पर विचार रखे।
पांच सूत्री कार्यक्रम
रोड सेफ्टी मैनेजमेंट: इसके तहत सुंदर कमेटी की संस्तुतियों के मुताबिक रोड सेफ्टी फंड की व्यवस्था की जाएगी। राज्यवार रोड क्रैश डाटाबेस और उसके विश्लेषण का सिस्टम बनाया जाएगा।
सेफर रोड्स एंड मोबिलिटी: इसके तहत संवेदनशील कॉरीडोर्स और कस्बों में बच्चों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर फोकस किया जाएगा।
सेफर व्हीकल्स: इसमें वाहनों की सुरक्षा के मानकों की समीक्षा होगी। भारी वाहन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के परमिट की प्रक्रिया सुधारी जाएगी। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता तय की जाएगी।
सेफर रोड यूजर्स: इसमें स्पीड, सेफ्टी बेल्ट, शराब पीकर ड्राइविंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ ही और स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
पोस्ट क्रैश रिस्पांस: इसमें हादसे के बाद किए जाने वाले सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान दिया जाएगा। घायलों को तत्काल इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराने पर काम होगा।