बहराइच के अध्यापक दंपती ने 12 साल की नौकरानी को बच्चा नहीं संभाल पाने पर इतनी यातनाएं दी कि सुनकर रूह कांप जाए। कई दिनों तक खाना नहीं दिया। इससे भी मन नहीं भरा तो मोमबत्ती से दागा, पिटाई की। गलती हुई तो चप्पलें चटवाईं।
यातनाओं के चलते पांच माह में ही बच्ची हांड़-मांस का पुतला बनकर रह गई। वाराणसी में जब बच्ची के माता-पिता को यातना की जानकारी मिली तो वे उसे वापस ले गए। उसे वहां दीनदयाल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
कोतवाली नानपारा अंतर्गत मोहल्ला किला में रहने वाले मूल रूप से वाराणसी के कोटवां गांव निवासी नौशाद अली रेशमा आरिफ महाविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रवक्ता हैं। उनकी पत्नी माहे नूरी नाज सआदत इंटर कॉलेज में कला की टीचर हैं।
वाराणसी के कोटवां गांव के यूसुफ उर्फ नाटे बुनकर की बेटी मोमिना को नौशाद का साला कलाम यहां यह कहकर लाया कि वह उसका भविष्य संवार देगा। इसके एवज में मोमिना को सिर्फ एक छोटे बच्चे की देखभाल करनी होगी। गरीब मां-बाप ने विश्वास कर बेटी को उसके साथ भेज दिया।