राजधानी के मास्टर प्लान-2031 का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है। इसमें 2031 तक राजधानी की आबादी करीब 65 से 70 लाख मान कर प्लानिंग की गई है। खास बात है कि 200 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में भी अपार्टमेंट बनाने के लिए हरी झंडी दी जा सकेगी। अभी दो हजार वर्गमीटर में ही अपार्टमेंट बनाए जा सकते हैं। हालांकि इसके लिए 9 मीटर से ज्यादा चौड़ी सड़क होने की शर्त रखी गई है।
जैसे-जैसे क्षेत्रफल बढ़ता जाएगा, सड़क की चौड़ाई को भी बढ़ाया जाएगा। इससे शहर में आवासीय सुविधाओं को आसानी से मुहैया करवाया जा सकेगा। मगर इस ड्राफ्ट को मंजूरी देने से पहले प्राधिकरण शहर में कई वर्गों के लोगों से सीधी बातचीत कर मास्टर प्लान को लेकर उनकी राय लेगा। इस राय के आधार पर ही महायोजना को मंजूरी दी जाएगी। मास्टर प्लान में क्या खास है, क्या व्यवस्थाएं हैं, पेश है रिपोर्ट....
मास्टर प्लान-2031 के साथ अगले महीने तक आउटर रिंग रोड को एलडीए बोर्ड में प्रस्तावित करने की तैयारी है। प्रस्तावित आउटर रिंग रोड रूट में कानपुर रोड, बाराबंकी फैजाबाद रोड, काकोरी हरदोई रोड और सुल्तानपुर रोड पर विशेष जोर दिया गया है। बीकेटी से कुर्सी रोड, बेहटा होते हुए कानपुर रोड स्थित बनी और वहां से मोहान और काकोरी होते हुए बीकेटी तक पहुंचने के लिए आउटर रिंग रोड बनाने की तैयारी है।
लखनऊ महायोजना 2031 के तहत एलडीए के विकास क्षेत्र का हिस्सा बनाए गए 9 ब्लॉकों को कवर करते हुए बनने वाली इस रिंग रोड के निर्माण में करीब 5000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया, एलडीए और पीडब्लूडी मिलकर काम करेंगे। करीब पांच हजार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट का खर्च प्रदेश सरकार और केंद्र मिलकर उठाएंगे।
कम जमीन पर बनेंगे अधिक फ्लैट
ग्रुप हाउसिंग में अब तक केवल 2000 वर्ग मीटर तक में ही अपार्टमेंट बनाए जा सकते हैं। इसको कम से कम 200 वर्ग मीटर कर दिया गया है। मगर फ्लैटों की संख्या को सीमित रखा गया है। प्रस्ताव के मुताबिक 200-300 वर्ग मीटर में चार फ्लैट बनाए जा सकेंगे। मगर सामने की सड़क नौ मीटर चौड़ी होनी चाहिए।
जबकि 300 से 500 वर्ग मीटर तक में 6 फ्लैटों की अनुमति दी जा रही है। जरूरी यह भी है कि, 6 फ्लैटों वाले इस अपार्टमेंट के सामने वाली सड़क 12 मीटर चौड़ी हो। अविकसित क्षेत्र जहां अभी नगर निगम की जगह प्राधिकरण ही डवलपमेंट कर रहा है, सड़क 18 मीटर चौड़ी होनी चाहिए।
जबकि 500 से 2000 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर 12 फ्लैट बनाए जा सकेंगे। इसमें सड़क की चौड़ाई का मानक 300 से 500 वर्ग मीटर के हिसाब से ही रहेगा। एक से अधिक भूखंडों को जोड़ कर अपार्टमेंट नहीं बनाए जा सकेंगे। इस तरह से अपार्टमेंट बनाने के लिए कुल भूमि के मूल्य का 25 फीसदी इंपैक्ट फीस देनी होगी। यह फीस डीएम सर्किल रेट के हिसाब से तय की जाएगी।
बेसमेंट बनाना होगा आसान
1 . बेसमेंट को लेकर जो प्रस्ताव भेजे गए हैं, उनमें 100 वर्ग मीटर तक आवासीय और व्यावसायिक भवन में बेसमेंट को वैध कर दिया गया है मगर कवर्ड एरिया का केवल 20 फीसदी भाग ही इसके लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
2 . 100 से 500 वर्ग मीटर तक के लिए आवासीय में कवर्ड एरिया का 50 फीसदी बेसमेंट बनाया जा सकता है। जबकि गैर आवासीय में 100 प्रतिशत कवर्ड एरिया को बेसमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
3 . 500 से 1000 वर्ग मीटर तक के लिए आवासीय में बिल्डिंग की इन्वेलप लाइन तक एक बेसमेंट की इजाजत होगी। जबकि गैर आवासीय में बिल्डिंग की इन्वेलप लाइन तक दो बेसमेंट की इजाजत होगी। ऐसे में कामर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने वालों को अधिक पार्किंग स्पेस कम जगह में मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ शापिंग माल्स को मिलेगा।
4 . 1000 से 2000 वर्ग मीटर भूखंडों में अब एक की जगह दो बेसमेंट की इजाजत देनेे का प्रस्ताव है। जबकि 2000 से 10000 वर्ग मीटर तक में 4 बेसमेंट बनाए जा सकेंगे। पार्किंग की जो कीमत ली जाती थी, वह भी कम हो जाएगी।
मास्टर प्लान-2031 को लेकर शहर में विभिन्न वर्ग के लोगों की राय बहुत महत्वपूर्ण होगी। इसको लेकर हम बात करेंगे। सभी वर्ग के लोगों को आमने-सामने रखेंगे। उनकी राय के आधार पर शहर को विकसित किया जाएगा। शहर की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 200 वर्ग मीटर क्षेत्रफल भूमि पर भी अपार्टमेंट को मंजूरी मिलेगी।
सत्येंद्र कुमार सिंह, उपाध्यक्ष, लविप्रा