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UP: हर साल बिक रहा 44 हजार करोड़ का मसाला-तंबाकू, 14 हजार करोड़ की टैक्स चोरी; शीर्ष पर दिल्ली-UP, महाराष्ट्र

Wed, 10 May 2023 09:29 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

जीएसटी जांच विंग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 140 करोड़ की आबादी में हर साल 140 अरब पान मसाले और तंबाकू की पुड़िया खप रही है। खास बात ये है कि न तो इसमें गांव-कस्बों में बिकने वाले स्थानीय ब्रांड शामिल हैं और न ही चोरी से चल रही पान मसाला मशीनों से निकलने वाले माल को इसमें जोड़ा गया है। 
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पान मसाला (सांकेतिक) - फोटो : social media
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विस्तार
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पान मसाला और तंबाकू प्रेमियों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। इंटरनेशनल मार्केट एनालिसिस रिसर्च एंड कंसलटिंग ग्रुप (आईमार्क) के मुताबिक भारत में पान मसाला बाजार वर्ष 2022 में 43410 करोड़ रुपये का था। 
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जो वर्ष 2028 तक बढ़कर 53678 करोड़ रुपये का हो जाएगा। मसाला-तंबाकू खाने वाले लोग हर साल चार फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक अकेले इसी सेक्टर में हर साल 14 हजार करोड़ की टैक्स चोरी की जा रही है।

हर साल चबा रहे 140 अरब मसाला-तंबाकू पाउच
जीएसटी जांच विंग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 140 करोड़ की आबादी में हर साल 140 अरब पान मसाले और तंबाकू की पुड़िया खप रही है। खास बात ये है कि न तो इसमें गांव-कस्बों में बिकने वाले स्थानीय ब्रांड शामिल हैं और न ही चोरी से चल रही पान मसाला मशीनों से निकलने वाले माल को इसमें जोड़ा गया है। 
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इन 140 अरब पुड़िया में 95 अरब मसाले और 45 अरब तंबाकू की हिस्सेदारी है। उन्होंने चिंता जताते हुए बताया कि तंबाकू के मुकाबले सादे पान मसाले की मांग 11 फीसदी बढ़ी है। यानी युवा पीढ़ी में मसाले की लत बढ़ी है।

कर चोरी में दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र शीर्ष पर
मसाला सेक्टर में कर चोरी के खेल में दिल्ली, यूपी और महाराष्ट्र सबसे ऊपर हैं। उनके बाद गुजरात का नंबर आता है। जांच एजेंसी के मुताबिक 3100 करोड़ की कर चोरी अकेले यूपी में हो रही है। मशीनों की स्पीड 700 से बढ़कर 2500 पाउच प्रति मिनट पहुंच गई है। जांच विंग का कहना है कि रफ्तार की निगरानी कर पाना बेहद मुश्किल है। 

 

पान मसाला में भंडारण नहीं किया जाता बल्कि लगातार माल निकलता रहता है। फैक्टरी से बाहर निकलने के बाद जल्द से जल्द ठेलों व गुमटियों में पहुंच जाता है। यही वजह है कि छापों और जांच में मौके पर मिले माल पर कर चोरी का आंकलन किया जाता है। किसी एक इकाई की जांच भी बार-बार नहीं की जा सकती।

 
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विंग के मुताबिक अब नया डाटा बनाया जा रहा है। नए सिरे से इकाइयों की डाटा एनालिटिक्स और निगरानी प्रणाली तैयार की जा रही है। जीएसटी में मशीनों की स्पीड पर निगरानी के लिए एक्सपर्ट्स की विशेष विंग को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है।
 
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