पहली जुलाई से जीएसटी के लागू होने के साथ ही प्रदेश में टैक्स के कई कानून खत्म हो जाएंगे। ‘एक देश, एक कर’ प्रणाली का प्रदेश स्तर पर क्रियान्वयन की जिम्मेदारी वाणिज्यकर विभाग को सौंपी गई है।
लिहाजा टैक्स के कई कानून को जीएसटी के नोडल विभाग के तौर पर काम करने वाले वाणिज्य कर विभाग में समायोजित कर दिया जाएगा।
ऐसे में अब कई टैक्स कानून पहली जुलाई से समाप्त माने जाएंगे, जिनका क्रियान्वयन वाणिज्य कर, आबकारी, नगर विकास, गन्ना विकास, पर्यटन व मनोरंजन कर आदि विभाग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, मनोरंजन कर विभाग का तो अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। क्योंकि यह विभाग पूरी तरह से वाणिज्य कर विभाग में समायोजित हो जाएगा।
नतीजतन पहली जुलाई से मनोरंजन कर विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी वाणिज्य कर विभाग के कार्मिक माने जाएंगे।
अभी तक लगते हैं कई तरह के टैक्स
मौजूदा समय में प्रदेश के कई विभागों द्वारा अलग-अलग टैक्स लिए जाते हैं। इसके लिए अलग-अलग कानून हैं।
लेकिन केंद्र सरकार ने जब ‘एक देश, एक कर’ की अवधारणा के तहत देश भर में जीएसटी लागू करने का निर्णय लिया था तो तरह-तरह के टैक्स के झंझटों से जनता को मुक्ति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लागू बहुत से करों से संबंधित कानूनों को समाप्त करने का भी फैसला किया था।
साथ ही ऐसे कई कानूनों के स्थान पर जीएसटी के जरिए ही टैक्स वसूलने का प्रावधान किया गया। लिहाजा प्रदेश सरकार द्वारा लागू कई टैक्स कानूनों को भी जीएसटी में समायोजित कर दिया गया है।
किस विभाग के खत्म होंगे कौन से टैक्स कानून
वाणिज्य कर : उप्र मूल्य संवर्धित कर अधिनियम,2008
वाणिज्य कर : उप्र स्थानीय क्षेत्र में माल केप्रवेश पर कर अधिनियम, 2007
मनोरंजन कर : उप्र आमोद एवं पणकर अधिनियम,1979
नगर विकास : उप्र विज्ञापन कर अधिनियम,1981
आबकारी : संयुक्त प्रांत मोटर स्पिरिट, डीजल तथा अल्कोहल कराधान अधिनियम,1939
गन्ना विकास : उप्र गन्ना क्रयकर अधिनियम,1961
पर्यटन : सुख-साधन कर अधिनियम,1995