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बी चंद्रकला तक नहीं थमेगी अवैध खनन की जांच, चार और अधिकारियों तक भी जाएगी आंच

Mon, 07 Jan 2019 12:55 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : social media
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अवैध खनन की जांच की आंच सिर्फ हमीरपुर ही नहीं, बल्कि शामली, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर व देवरिया के ठेकेदारों और पूर्व जिलाधिकारियों तक पहुंचेगी जहां खनन पट्टे रेवड़ी की तरह बांटे गए थे।

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दो साल की जांच के बाद सीबीआई की टीम ने अभी हमीरपुर के मामले में कार्रवाई शुरू की है। आने वाले दिनों में अन्य जिलों से संबंधित अधिकारी और ठेकेदार भी जांच की जद में आएंगे। इसके अलावा सीबीआई कौशांबी में हुए अवैध खनन मामले की भी जांच कर रही है।

सूत्रों का कहना है कि हमीरपुर के मामले में सीबीआई की जांच आईएएस अधिकारी बी चंद्रकला तक ही नहीं सिमटेगी। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के स्टाफ के अलावा दो-तीन और आईएएस अधिकारी भी सीबीआई के रडार पर हैं। जल्द ही सीबीआई इन अधिकारियों से भी पूछताछ करेगी।
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सूत्रों का दावा है कि वर्ष 2013 में हमीरपुर में जारी 13 खनन पट्टों में सीबीआई को काफी खामियां मिली हैं। नियमों को दरकिनार कर कुछ खास लोगों को ये पट्टे दिए गए थे। ये पट्टे डीएम से लेकर सीएम तक ने चंद दिनों में ही आवंटित कर दिए थे। इस आवंटन में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सचिव रहे आलोक कुमार ने हस्ताक्षर किए थे।

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30 जून 2017 को कौशांबी के अधिकारी पर दर्ज हुआ था केस

उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने 30 जून 2017 को एक केस दर्ज किया था। सीबीआई मुख्यालय दिल्ली में दर्ज हुए इस मामले में कौशांबी के सहायक भू-विज्ञान अधिकारी समेत नौ लोगों को नामजद किया गया था। सीबीआई ने शुरुआती जांच में पाया कि कौशांबी में अवैध खनन से सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने में तत्कालीन सहायक भू-विज्ञान अधिकारी अरविंद कुमार दोषी हैं। 

अरविंद पर आरोप था कि उन्होंने नियमों को दरकिनार करते हुए प्राइवेट लोगों के साथ षड्यंत्र रचा। इस मामले में सीबीआई ने वर्ष 2015-16 में अवैध खनन में शामिल खनन माफिया अमित यादव, जेपी पांडेय, अनिल यादव, राशिद अजीज, मोहम्मद रिजवान, नरेंद्र पाल सिंह, बलजीत सिंह और हरबीर सिंह को नामजद करने के साथ अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। लगभग डेढ़ साल बाद सीबीआई ने इस मामले में दूसरी एफआईआर दर्ज करते हुए कार्रवाई शुरू की है। 
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