स्वास्थ्य सेवाओं में बीते 10 सालों में काफी सुधार हुआ है। खासतौर से गर्भवस्था के दौरान गर्भवती की जांच के आंकड़े सुधरे हैं। संस्थागत प्रसव में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके अलावा बच्चों के सर्म्पूण टीकाकरण के लिए भी माता-पिता जागरूक हुए हैं। लेकिन 2005-06 में हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस)-3 और 2015-16 में एनएफएचएस-4 के आंकड़ों की तुलना करें तो तस्वीर बहुत अच्छी नहीं दिखती।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) 4 के अनुसार गर्भावस्था के दौरान गर्भवती की चार बार जरूरी जांच के आंकड़ों में भी काफी सुधार आया है लेकिन ये अभी भी मात्र 51.2 फीसदी है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 44.8 फीसदी और शहरी में 66.4 फीसदी गर्भवती का एंटी नेटल चेकअप (एएनसी) हुआ। जबकि एनएफएचएस-3 में एएनसी जांच मात्र 37 फीसदी थी।