बाल विवाह अपराध है। लेकिन इस अपराध से अभी भी कुछ लोग बेखौफ हैं। खेलने पढ़ने की उम्र में बेटियों के हाथ पीले कर रहे हैं। वह भी अधेड़ के साथ। ऐसा ही वाकया सोमवार को जंगल से सटे पैरुआ गांव में देखने को मिला। यहां नाबालिक पौत्री का विवाह करने का बाबा विरोध कर रहा था।
उसने सूचना पुलिस को दे दी तो बेटी को ससुराल ले जाकर पिता ने 45 वर्षीय व्यक्ति से विवाह की रस्म पूरी की। बाबा की सूचना पर मोतीपुर पुलिस जांच में जुटी हुई है। पिता के लौटने पर केस दर्ज कर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
मोतीपुर थाना अंतर्गत पैरुआ गांव निवासी मुरली यादव ने अपनी 12 वर्षीय पुत्री का विवाह कोतवाली मुर्तिहा के प्रतापपुर गांव निवासी पांडेय यादव (45) पुत्र चंद्रिका से माह भर पूर्व तय किया था। इसकी जानकारी जब परिवार के लोगों को हुई तो पिता के उम्र के दूल्हे की बात सुनकर परिवारीजन भड़क उठे।
मुरली यादव का पिता जगमोहन यादव विवाह की खिलाफत करने लगा। महिलाएं भी इस बेमेल विवाह के पक्ष में नहीं थीं। लेकिन मुरली अड़ा हुआ था। इस पर जगमोहन ने बेटे द्वारा नाबालिक पौत्री का बेमेल विवाह करने की सूचना मोतीपुर पुलिस को दी। लेकिन पुलिस जब तक घर पहुंचती, तब तक मुरली अपनी 12 वर्षीय बेटी को साथ लेकर पांडेय यादव के घर प्रतापपुर चला गया।
रात में ही आनन-फानन में पैर पूजन करके विवाह की रस्म अदायगी कर दी। प्रतापपुर गांव में कई लोगों ने बेमेल विवाह का विरोध किया, लेकिन मुरली यादव टस से मस नहीं हुआ।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए प्रभारी निरीक्षक हेमंत कुमार गौड़ ने तहा कि नाबालिक बालिका के बाबा ने पौत्री का विवाह करने की सूचना दी थी पर पुलिस टीम के पहुंचने के पहले ही पिता बालिका को लेकर प्रतापपुर गांव चला गया। यह गांव दूसरे थाना क्षेत्र में स्थित है। ऐसे में मुरली के गांव लौटने पर केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
पौत्री के भविष्य को लेकर फफक रहा बाबा
घर पर सुबह मौजूद जगमोहन पौत्री के भविष्य को लेकर फफकता मिला। अमर उजाला प्रतिनिधि से बातचीत के दौरान उसने कहा कि 12 साल की पौत्री की शादी बेेटे ने 45 वर्ष के अधेड़ से कर दी है। विरोध करने पर बेटे की ओर से मेरे मरने की दुआ मांगी जा रही है।
तो बाल विवाह पर कब लगेगा अंकुश
तराई के जिले बाल विवाह में अव्वल हैं। श्रावस्ती जिला तो पहले स्थान पर है ही। बहराइच जनपद भी 20वें पायदान के आसपास है। नाबालिक रिंकी के हाथ पीले होने के पहले भी कई नाबालिक बेटियां बाल विवाह का शिकार हो चुकी हैं। जबकि बाल विवाह पर अंकुश के लिए कई स्वयं सेवी संस्थाएं आए दिन ढिंढोरा पीटती हैं। प्रशासन भी कार्रवाई की बात कहता है। इसके बावजूद बाल विवाह थम नहीं रहा है।