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डेढ़ किलोमीटर के दायरे में 450 होटल, 163 हैं अवैध, फिर भी पुलिस प्रशासन खामोश क्यों

Thu, 21 Jun 2018 10:02 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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गली में चल रहा अवैध होटल व रेस्टोरेंट - फोटो : amar ujala
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लखनऊ में नाका के होटल एसएसजे इंटरनेशनल और विराट इंटरनेशनल की आग में पांच मौतों ने एक बार फिर राजधानी के पुलिस-प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। नाका में डेढ़ किलोमीटर के दायरे में 450 से अधिक होटल-लॉज और धर्मशालाओं में मौत नंगा नाच कर रही है और अफसर आंखें मूंदे सो रहे हैं।

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इन होटल, लॉज और धर्मशालाओं में 163 अवैध हैं, यह जानने-समझने के बाद भी पुलिस-प्रशासन के अफसर खामोश क्यों बैठे हैं। सवाल यह है कि आखिर राजधानी के अधिकारी और जिम्मेदार कब गंभीर होंगे। अवैध होटलों में और कितनी जिंदगियां कुर्बान होंगी।

ऐसे होटल-लॉज और धर्मशालाओं के खिलाफ कब कार्रवाई होगी? नाका के चारबाग, दूध मंडी, आर्यनगर सहित अन्य इलाकों में हर घर में होटल-लॉज या धर्मशाला खुल गई है। ‘एसी और नॉन एसी रूम उपलब्ध हैं’ के बोर्ड टंगे हैं।
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रिसेप्शन पर स्वागत करती महिला कर्मचारी के साथ ही प्रबंधक, सर्विस बॉय, किचन में खानसामा से लेकर चादर-तकिया धोने और साफ-सफाई करने के लिए स्टाफ तक यहां मौजूद मिलेगा। लेकिन लखनऊ विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नक्शा, अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र, बिजली और पानी के वैध संयोजन सहित अन्य जरूरी विभागों में पंजीकरण से संबंधित औपचारिकताएं यहां नहीं हैं।

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अवैध होटल बन गए हैं कमाई का जरिया

गली में चल रहा अवैध होटल व रेस्टोरेंट - फोटो : amar ujala
जिन होटलों में मंगलवार सुबह अग्निकांड हुआ, उनके सामने ही 500 से 650 वर्ग फुट के मकानों को तीन से चार मंजिल की लॉज और धर्मशालाओं का रूप दे दिया गया है। ऊपर जाने के लिए मात्र डेढ़ से दो फुट चौड़ी सीढ़ियां हैं। हादसे के वक्त यह सीढ़ियां कितनी मदद कर पाएंगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

यही वजह है कि यहां ठहरने वाले लोगों की जिंदगी पर हर वक्त मौत का साया मंडराता रहता है। वास्तव में नाका इलाके के सारे वैध और अवैध होटल-लॉज व धर्मशालाएं पुलिस-प्रशासन और अग्निशनम विभाग सहित अन्य महकमों के लिए कमाई का जरिया बन गई हैं।
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