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UP: 'राम को गाली देने वाले स्वीकार नहीं...', सपा से निकाले जाने के बाद मनोज पांडेय ने अखिलेश पर कही बड़ी बात

सार

सपा से निकाले जाने के बाद मनोज पांडेय ने कहा कि राम को गाली देने वाले स्वीकार नहीं हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने अखिलेश यादव पर भी बड़ी बात कही। आगे पढ़ें बातचीत का पूरा अंश...
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मनोज कुमार पांडेय, विधायक-ऊंचाहार (रायबरेली) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी (सपा) ने सोमवार को तीन विधायकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। तीन विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिन विधायकों पर कार्रवाई हुई उसमें विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और मनोज कुमार पांडेय शामिल हैं। सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए समाजवादी पार्टी ने इसकी जानकारी दी। 

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सपा ने एक्स पर की पोस्ट में लिखा कि विधायक अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और मनोज कुमार पांडेय को "उनकी सांप्रदायिक विभाजनकारी नकारात्मकता और किसान विरोधी, महिला विरोधी, युवा विरोधी, कारोबारी विरोधी, नौकरीपेशा विरोधी और 'पीडीए विरोधी' विचारधारा का समर्थन करने के कारण" निष्कासित कर दिया गया है। 

पोस्ट में यह भी लिखा है कि इन लोगों को हृदय परिवर्तन के लिए दी गई 'अनुग्रह-अवधि' की समय-सीमा अब पूरी हुई। शेष की समय-सीमा अच्छे व्यवहार के कारण शेष है। भविष्य में भी 'जन-विरोधी' लोगों के लिए पार्टी में कोई स्थान नहीं होगा। पार्टी के मूल विचार की विरोधी गतिविधियां सदैव अक्षम्य मानी जाएंगी। जहां रहें, विश्वसनीय रहें।
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गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ली थी

सपा की कार्रवाई के बाद अमर उजाला ने उंचाहार से विधायक मनोज कुमार पांडेय से बातचीत की। इसमें उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। बताया कि सपा ने बहुत देर कर दी, हमनें तो 18 मई 2024 को ही अपनी रणनीति बना ली थी। जब हमने गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ले ली थी। आगे सवाल-जवाब पढ़ें, इससे पहले एक नजर डाल लेते हैं, मनोज पांडेय के परिचय पर...  

मनोज पांडेय से मिलने गृहमंत्री अमित शाह उनके घर गए थे

मनोज पांडेय रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़ी थी। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद से वह भाजपा के खेमे में आ गए थे। लोकसभा चुनाव के पहले रायबरेली सीट से इस बात के भी संकेत मिल रहे थे कि हो सकता है कि मनोज पांडेय को ही टिकट दे दिया जाए।

बाद में दिनेश प्रताप सिंह को रायबरेली से टिकट मिला। खास बात यह रही कि मनोज पांडेय ने दिनेश प्रताप सिंह की सभाओं से दूरी बना ली थी। उनकी नाराजगी को भांपकर गृहमंत्री अमित शाह उनसे मिलने के लिए उनके घर गए थे। इसके बाद मनोज पांडेय चुनाव प्रचार के लिए निकले थे।
 

अब अमर उजाला से बातचीत के अंश...

सवाल- सपा में दो दशक से अधिक समय बिताने के बाद ऐसा क्या हुआ कि हृदय परिवर्तन हो गया? 
जवाब- मैं समाजवादी पार्टी की सरकार में दो बार मंत्री रहा। पार्टी का सचिव तक रहा। मैंने पूरी ईमानदारी से जनता के हित के लिए काम किया। हमने सपा के लिए लाठी-डंडे खाए। हम किसानों, दलितों, पिछड़ों के हक के लिए लड़े। हम अन्याय के खिलाफ लड़े। हमारा इतिहास कभी ऐसा नहीं रहा कि हम फूलों पर चलकर आगे बढ़े हों। लेकिन, हमें आस्था से खिलवाड़ स्वीकार नहीं है। हमने कई बार पार्टी नेतृत्व को यह बात बताई। जिसने मां सीता को गाली दी, भगवान राम को गाली दी, वह पार्टी में महासचिव बना दिया गया। जब दूसरे दिन रामचरितमानस जलाई तो उसे विधान परिषद सदस्य बना दिया गया। मैंने उस समय से इसका विरोध किया। पार्टी के सामने अपनी बात रखी। जिस राजनीति में हमारी आस्था से खिलवाड़ होगा, ना तो वह राजनीति हमें स्वीकार है... ना कोई पद प्रतिष्ठा। 

सवाल- क्या आपके ब्राह्मण होने के नाते सपा में आपकी बात नहीं सुनी गई?  
जवाब- जब जाति की बात आती है, तो सवाल तो उठेंगे ही। एक कहावत है... 'आंधर बांटे रेवड़ी...आपन-आपन पाए' जब वोट लेने की बात आती है, तब आपको (सपा) लगता है सबका वोट मिल जाए। जब देने की बात आती है तब जाति आ जाती है। सबका साथ-सबका विकास, पीएम मोदी से सीखना चाहिए। हर योजना का लाभ हर वर्ग के व्यक्ति को मिल रहा है। हर घर में टोटी से जल आ रहा है, पीडीए को भी फ्री राशन मिल रहा है। हर किसान को किसान सम्मान निधि मिल रही है। जो सबको साथ लेकर चलेंगे अब भारत की राजनीति में वही लोग सर्वाइव करेंगे। 
 
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सवाल- अखिलेश कहते हैं कि सपा जोड़ती है... भाजपा तोड़ती है? सपा पीडीए की बात करती है। इस पर क्या कहना है?
जवाब- किस पीडीए की बात करते हैं, जिसमें राजू पाल की दौड़ा-दौड़ाकर हत्या ढाई घंटे में कर दी गई। 19 गोली मारी गई। मारने वाले लोग जेल भी नहीं गए। वह भी तो पाल समाज से आता था और सिटिंग एमएलए भी था। उसे न्याय भी नहीं मिला। किस पीडीए की बात करते हैं, जिस पीडीए के यूपी में 99 फीसदी जिलाध्यक्ष सिर्फ एक जाति के हैं। किस पीडीए की बात करते हैं, जिस पीडीए में पिछड़े और अति पिछड़े जाति के लोग कभी न्याय नहीं पाए।  

सवाल- एक साल पहले आपने भाजपा की सदस्यता ले ली, तो पार्टी को निकालने में इतना समय क्यों लगा? क्या उनको आपके वापस आने की उम्मीद थी? 
जवाब- आश्चर्यचकित और हास्यास्पद फैसला है। मैं जिसके साथ था ही नहीं, उसे निकालने की बात कहां से आ गई। 

सवाल- अब आगे की रणनीति क्या है? क्या आगे भी ऊंचाहार से ही चुनाव लड़ेंगे? 
जवाब- रणनीति तो 18 मई 2024 को ही बन गई थी। उस दिन हम आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर चुके हैं। गरीबों की मदद के लिए, अपने क्षेत्र के विकास और उत्थान के लिए हम मेहनत कर रहे हैं। ऊंचाहार की जनता का आशीर्वाद रहेगा तो चुनाव वहीं होगा। वहीं की चौपालों में होगा। वहां की जनता इसका फैसला करेगी। लखनऊ के लोग इसका फैसला नहीं करेंगे। समाजवादी पार्टी का वहां कभी खाता नहीं खुला था। 403 लोगों को टिकट मिला था, लेकिन जीते सिर्फ 46 थे। उसमें ऊंचाहार की जनता ने हमें चुनकर लखनऊ भेजा था। 

सवाल- अखिलेश यादव के लिए क्या कहेंगे? 
जवाब- इसके जवाब में मनोज पांडेय ने सिर्फ 'सादर नमन' कहा।
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