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रूस को भायी यूपी के आम की मिठास: मास्को में 6 से 9 जुलाई तक हुआ महोत्सव का आयोजन, लोगों ने लाइन लगाकर लिया

Tue, 11 Jul 2023 09:20 AM IST
ishwar ashish अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ

सार

रूस में यूपी से भेजे गए आम की जबरदस्त मांग है। मास्को में आम महोत्सव का आयोजन किया गया। रूस की जनता की पसंद को देखते हुए कहा जा रहा है कि अगले सीजन में रूस आम का बड़ा बाजार हो सकता है।
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आम महोत्सव में लाइन लगाकर लोगों ने आम लिया। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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यूक्रेन से जंग लड़ रहे रूस की राजधानी मास्को में 6 से नौ जुलाई तक आयोजित आम महोत्सव में उत्तर प्रदेश के आमों के धूम रही। इसमें दशहरी, लंगड़ा, और आम्रपाली खूब पसंद किए गए। यूपी पहली बार इस महोत्सव में शामिल हुआ है। इसी का परिणाम है कि तत्काल डेढ़ से दो टन आम भेजने की तैयारी कर ली गई।

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महोत्सव में आधा दर्जन निर्यातकों के साथ दो टन आम लेकर उद्यान एवं कृषि व्यापार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह और निदेशक उद्यान आरके तोमर मास्को गए हैं। लोगों ने महोत्सव में यूपी का आम लाइन लगाकर लिया। जबकि यूपी से अब तक रूस को काफी कम आम जाता रहा है। महोत्सव में वहां के सरकारी नुमाइंदों और कारोबारियों संग हुई बैठक के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। उम्मीद है कि रूस अगले सीजन से यूपी के आमों का बड़ा बाजार हो सकता है। वर्तमान में अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, स्वीडन, उजबेकिस्तान, इटली, दक्षिण कोरिया, नेपाल, दुबई, भूटान, स्विटजरलैंड, फ्रांस आदि देशों में यूपी के आमों की काफी मांग है।

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महोत्सव में 700-800 रुपये प्रति किलो बिका आम
उद्यान विभाग के निदेशक आरके तोमर ने बताया कि मास्को में यूपी का आम 700 से 800 रुपये प्रति किलो बिका। हवाई जहाज का किराया 290 रुपये और अन्य खर्च 150 रुपये प्रति किलो आया। शेष बचत रही। निदेशक के मुताबिक महोत्सव से लौटते ही डेढ़ से दो टन आम तत्काल मास्को भेजा जाएगा। यह महोत्सव का नतीजा है कि यूपी के आम की डिमांड बढ़ गई है। इस बार टीम दशहरी, लंगड़ा, चौसा और आम्रपाली लेकर गई थी। भविष्य में अन्य आम भी भेजे जाएंगे। वैसे रूस में आम को अलग-अलग नामों की बजाय सिर्फ इंडियन मैंगो के रूप में पहचान ज्यादा है।

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13 आम फलपट्टी क्षेत्र, बनेगा कलस्टर

प्रदेश में घोषित कुल 16 फलपट्टी क्षेत्रों में से 13 आम पट्टी क्षेत्र हैं। उद्यान निदेशक के मुताबिक सहारनपुर, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, अमरोहा, प्रतापगढ़, वाराणसी, लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई, फैजाबाद व बाराबंकी आम पट्टी हैं। कौशांबी व बदायूं अमरूद का और प्रतापगढ़ आंवला का पट्टी क्षेत्र है। केंद्र सरकार ने आम के लिए एक बड़ा क्लस्टर बनाने को भी कहा है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। केवल लखनऊ पट्टी में ही 30 हजार हेक्टेयर से अधिक में आम का उत्पादन होता है।

यूपी में सवा तीन लाख हेक्टेयर में आम की खेती
यूपी में लगभग सवा तीन लाख हेक्टेयर भूभाग पर आम की खेती होती है। लगभग 60 लाख टन से ज्यादा आम का उत्पादन होता है। इनमें दशहरी, चौसा और लंगड़ा का उत्पादन सबसे ज्यादा है। वर्ष 2020-21 में यूपी से 104 टन आम का निर्यात हुआ था। वर्ष 2021-22 में यह बढ़कर 4122 टन और वर्ष 2022-23 में जनवरी तक 527 मीट्रिक टन हो गया। इस साल जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों में भी आम जा रहा है।
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