हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सेवा संबंधी एक अहम फैसले में कहा कि कोई भी विभाग किसी भी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच से बचने के शॉर्टकट के रूप में उसकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश नहीं दे सकता है। कोर्ट ने 14 जून 2018 के याची के अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को अवांछित करार देते हुए रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने यह अहम आदेश वन विभाग के कर्मचारी अरुण कुमार की याचिका को मंजूर करते हुए दिया। याची ने विभाग के प्रमुख सचिव के 14 जून 2018 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत उसे अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति दे दी गई थी।
याची के वकील का कहना था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश कानून की मंशा के मुताबिक नहीं है, क्योंकि याची के सेवा संबंधी रिकॉर्ड को ठीक से जांचे-परखे बगैर उसके खिलाफ विभागीय जांच से बचने के लिए यह आदेश पारित किया गया है।