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UP: हर अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन रखना अनिवार्य, कमी पर होगी कार्रवाई; लापरवाही पर अधीक्षक होंगे जिम्मेदार

Tue, 04 Aug 2026 08:19 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी में हर अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन रखना अनिवार्य होगा। कमी पर कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही पर अस्पताल अधीक्षक जिम्मेदार होंगे। इसके अलावा अस्पतालों में आवारा पशुओं की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नामित होंगे। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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एंटी रैबीज वैक्सीन (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन और एंटी रैबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (एआरआईजी) का पर्याप्त स्टॉक रखना अब अनिवार्य होगा। मरीज के अस्पताल पहुंचने पर वैक्सीन उपलब्ध न होने की स्थिति में संबंधित अस्पताल अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने इस संबंध में सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों (सीएमओ) और अस्पताल अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं।

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निर्देश उच्चतम न्यायालय की सख्ती के बाद जारी किए गए हैं। कोर्ट ने अस्पतालों और स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी तथा डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों को काटने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए प्रभावी व्यवस्था के निर्देश दिए थे। 

अस्पताल परिसर आवारा कुत्तों और पशुओं से मुक्त रखने के निर्देश

महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन की कमी नहीं होनी चाहिए। स्टॉक दो-तीन दिन का शेष रहते ही अतिरिक्त वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही अस्पताल परिसर को आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं से मुक्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके लिए प्रत्येक अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा, जो पशुओं की निगरानी, साफ-सफाई और संबंधित विभागों से समन्वय कर उन्हें परिसर से हटाने की जिम्मेदारी निभाएगा। नोडल अधिकारी का नाम और संपर्क विवरण अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रदर्शित किया जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर लोग सीधे संपर्क कर सकें। सभी व्यवस्थाएं लागू करने के बाद सीएमओ को महानिदेशालय को अनुपालन संबंधी शपथ पत्र भी भेजना होगा।

निजी अस्पतालों में भी कुत्तों की हो निगरानी

महानिदेशक ने निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और मल्टी स्पेशियलिटी अस्पतालों में भी आवारा जानवरों को घुसने से रोकने का निर्देश दिया है। सीएमओ कार्यालय से पंजीकृत सभी अस्पतालों को यह व्यवस्था बनानी होगी। नोडल अधिकारी संबंधित विभागों से संपर्क कर जानवरों को हटवाने का कार्य करेंगे। व्यवस्था बनाने के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी महानिदेशालय को शपथ पत्र भी भेजेंगे।

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