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यूपी: प्रदेश के चार हजार स्कूलों के ऊपर से गईं हाईटेंशन लाइन, हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब

Tue, 04 Aug 2026 07:58 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

UP schools: यूपी के करीब चार हजार स्कूलों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गई है। इस मामले में लखनऊ हाईकोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। 

 
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स्कूल की छत से गुजरा हाईटेंशन लाइन का तार।
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विस्तार
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 हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के करीब चार हजार स्कूलों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइनों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता को आदेश दिया कि सक्षम प्राधिकारी को इस आदेश की सूचना देकर अगली सुनवाई तक इस संबंध में उनका जवाब पेश करें।

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न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर दिया। न्यायमित्र ने अदालत को बताया कि कई मामलों में हाईटेंशन लाइनें स्कूल परिसरों पर गिर चुकी हैं जिससे बच्चों की जान खतरे में पड़ी। इस संबंध में किए गए अध्ययन और अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया। अदालत ने इसे गंभीर सार्वजनिक महत्व का विषय बताते हुए विस्तृत परीक्षण आवश्यक माना। सुनवाई के दौरान डीसीपी ट्रैफिक लखनऊ ने स्कूलों में ट्रैफिक मार्शलों की तैनाती पर प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार सात स्कूलों की व्यवस्था अच्छी, पांच की औसत और पांच की खराब पाई गई। अदालत ने रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लेते हुए शैक्षणिक संस्थानों की मदद से तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अगली सुनवाई तक पेश करने को कहा।

अदालत को यह भी बताया गया कि स्कूलों के आसपास ट्रैफिक नियंत्रण के लिए प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर काम चल रहा है। अगली सुनवाई में कैमरों की संख्या और अनुमानित लागत का ब्योरा दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
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नाबालिगों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट गंभीर
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्कूल बसों और वैन के संचालन को भी बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना। कोर्ट को बताया गया कि परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पुलिस सत्यापन में 2370 स्कूल वाहन चालकों में से 527 के खिलाफ मिशन भरोसा के तहत प्रतिकूल रिपोर्ट दर्ज मिली है। अदालत ने कहा कि यह नाबालिग बच्चों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा गंभीर विषय है। बार के कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि जहां संभव हो, स्कूल वैन में महिला चालकों की नियुक्ति पर विचार किया जाए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस सुझाव पर सरकार आवश्यक विचार करेगी।

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