लखनऊ। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन कर विभाग को आपूर्ति में सहयोग कर रहे उपभोक्ताओं को प्रबंधन की अनदेखी झेलनी पड़ रही है। लापरवाह कर्मचारियों की कारस्तानी से सोलर सिस्टम का नेट मीटर रेवेन्यू मैनेजमेंट सिस्टम से नहीं जुड़ पा रहा है। अमर उजाला की मुहिम से इसमें लापरवाही करने वालों की पहचान हुई है, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उपभोक्ता गलत बिल लेकर भटक रहे हैं।
प्रबंधन ने दावा किया था कि वर्टिकल सिस्टम से कार्यालय आए बिना ही उपभोक्ताओं की समस्याएं दूर होंगी, जबकि कार्यालय के चक्कर लगाने पर भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। हालांकि, कुछ उपभोक्ताओं के बिल सही हुए तो बिजली विभाग ही हजारों रुपये का बकायेदार निकला।
केस-1 : बिजली 500 यूनिट बनाते, फायदा 275 का ही
राजेश कुमार दीक्षित ने बताया कि कनेक्शन खाता संख्या 0111470000 पर चार किलोवाट सोलर सिस्टम से प्रतिमाह औसतन 500 यूनिट बिजली बनती है, मगर बिल में महज 275 से 375 यूनिट का ही फायदा मिलता है।
केस-2 : सोलर से बनी बिजली का समायोजन नहीं
शादाब अली ने बताया कि 29 मई को खाता संख्या 7743800000 पर तीन किलोवाट का सोलर लगवाया, 16 जून को नेट मीटर लगा। उन्हें जुलाई में 2,278 रुपये का बिल भेजा गया। इसमें सोलर बिजली का समायोजन नहीं हुआ।
केस-3 : विभाग और कंपनी के बीच पिस रहे
इंदिरानगर के बसेरा विहार कॉलोनी अमरईगांव की सुनीता सिंह (मो.नं. 9598381937) ने तीन किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया, मगर इससे बनने वाली बिजली का फायदा नहीं मिल रहा। शिकायत पर बिजली विभाग और सोलर कंपनी एक-दूसरे को दोषी बता रहे हैं।
केस-4 : बिजली बना रहे, पर बिल बढ़ता ही जा रहा
जितेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि उपभोक्ता संख्या 0111470000 पर नवंबर 2025 में सोलर सिस्टम लगवाया, लेकिन उनका बिजली बिल हर माह बढ़ता जा रहा है। मार्च में 305 रुपये, अप्रैल में 1,681 रुपये, मई में 2,746 रुपये, जून में 4,889 रुपये और जुलाई में 8,041 रुपये का बिल आया। 1912 हेल्पलाइन पर शिकायत करने पर हर बार सोलर सिस्टम लगाने वाली कंपनी से संपर्क करने को कहा जाता है।
Iअब सोलर उपभोक्ताओं के यहां प्री-कॉन्फिगर नेट मीटर लगाए जा रहे हैं। इस मीटर को लगाने के बाद सोलर पैनल को कनेक्ट करने की जरूरत नहीं होगी। सोलर से जो बिजली बनेगी, उसे सीधे मीटर पढ़कर दर्ज करेगा।I
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राम कुमार , मुख्य अभियंता, अमौसी जोनI