मैं चाहता हूं कि मेरे गांव की छतों से एचटी लाइन हट जाए ताकि मेरी तरह कोई और बच्चा यतीम न हो। कहना है लखनऊ में पानी की टंकी पर चढ़े जियाउल हक का। मेरठ के एक गांव के रहने वाले जियाउल कई साल से इस मांग सहित गांव के विकास के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि मरने से पहले उनकी मां ने उनसे दूसरों के लिए जीने का वादा लिया था। लगभग 9 साल बीतने के बाद भी जब उनकी एक भी मांग पूरी नहीं हुई तो हारकर उन्होंने ये कदम उठाया। जियाउल के साथ उनका दोस्त और दो बच्चे भी हैं। जाने क्या कहना है जियाउल का...
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आत्मदाह की कोशिश
- फोटो : amar ujala
मेरठ के नंगला शाहू थाना भावनपुर किला रोड का रहने वाले जियाउल हक ने बताया कि 1989 में हाईटेंशन लाइन में चिपककर उसके पिता की मृत्यु हो गई। इसके बाद 1997 में उसकी मां का भी देहांत हो गया। उनका कहना है कि हाईटेंशन लाइन की वजह से मेरे सिर से पिता का साया उठ गया। कुछ साल बाद मेरी मां भी मर गई और मैं यतीम हो गया। मेरी पढ़ाई पूरी नहीं हुई मैं सिर्फ पांचवीं तक पढ़ा हूं। जियाउल ने बताया कि मरने से पहले मां ने वचन लिया था कि हमेशा नेक काम करना और समाज सुधारने की कोशिश करना इसके लिए भले ही कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़े।
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सुसाइड कीकोशिश
- फोटो : amar ujala
जियाउल ने बताया कि 2007 से समाज की भलाई के लिए प्रयासरत हूं। मेरे गांव की आबादी 5 लाख है लेकिन वहां इंटर कॉलेज, बैंक, डाकघर, जच्चा-बच्चा केंद्र, गैस एजेंसी जैसी सुविधाएं नहीं है। साल दर साल अफसर बदलते गए और मांगें कागज पर ही रह गईं।
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सुसाइड
- फोटो : amar ujala
उसने बताया कि इतने साल से संघर्ष करते-करते उसकी जमीन बिक चुकी है। अब उसकी हिम्मत जवाब दे गई है इसलिए आत्मदाह करना चाहता है। उसका कहना है कि इतने साल संघर्ष के बाद मां की आखिरी इच्छा अधूरी रह गई तो मैं जी नहीं पाऊंगा।
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सुसाइड की कोशिश
- फोटो : amar ujala
जियाउल को समझाने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पहुंचे। उसे पूरे दिन समझा-बुझाकर नीचे लाने की कोशिश की जाती रही लेकिन वह नहीं माना। आखिरकार शाम छह बजे जियाउल को नीचे लाया जा सका।