बीटीसी छात्र बृजेंद्र और लड़की आशा देवी का प्यार इस कदर परवान चढ़ा था कि दोनों ने उम्र भर साथ रहने की हसरत पाल ली थी। समाज और अपनों की बंदिशों ने उन्हें एक नहीं होने दिया। प्रेमिका की शादी दूसरी जगह तय कर दी गई। इस बात से बृजेंद्र अंदर ही अंदर टूट गया था। उसने यह बात किसी से कही तो नहीं, लेकिन उसने वह कर दिया, जिसे शायद यह दोनों परिवार भूल पाए।
इस घटना से दोनों की प्रेम कहानी का दुखद अंत हो गया। जहां पर खुशियां गुलजार थी। लोग बरातों का स्वागत करने को बेताब थे। गाना बजाना हो रहा था। वहां मातम छा गया है और हर आंखों में आंसू दिख रहे हैं। जो भी इस घटना को सुन रहा है, वह अवाक रह जाता है।
बछरावां-मौरावा मार्ग पर स्थित छोटे से गांव गजियापुर में एक बेटी की डोली उठने से पहले ही उसकी अर्थी उठ गई। इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। जिसने भी हादसे के बारे में सुना उसकी आंखें नम हो गईं। गजियापुर गांव की रहने वाली आशा को उसके मां-बाप ने बड़े ही लाड से पाला और परास्नातक तक की पढ़ाई कराई थी।
मां-बाप ने अपनी बेटी का विवाह उन्नाव जनपद के आशा खेड़ा मजरे कुशहरी थाना नवाबगंज में तय कर दी थी। रात को बारात आई। जय माल की रस्में अदा हो ही रही थी कि काल का खेल ऐसा शुरू हुआ की खुशियों को जैसे किसी की नजर लग गई हो। प्रेमी ने प्रेमिका को गोली मारने के बाद खुद को भी खत्म कर लिया।