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Lucknow News: मालन अलबेली... में महके मालिनी अवस्थी के सुर

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लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी।
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लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह की छठवीं शाम लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी के सुरों के नाम रही। शुक्रवार को मंच पर मालन अलबेली... नाटक की संगीतमयी प्रस्तुति के जरिये एक ऐसी लड़की की कहानी मंच पर उतरकर आई जो गायिका है। उस लड़की के जीवन में चुनौतियां थीं, ताने थे लेकिन हौसले के साथ जुनून भी भरपूर था। सपनों को हकीकत में बदलने की यह कहानी एकल प्रस्तुति के रूप में गीतमाला में पिरोकर परोसी गई।
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बीएनए के राज बिसारिया प्रेक्षागृह में मंचित इस प्रस्तुति में जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती गई, गीतों की फेहरिस्त भी आगे बढ़ती गई। अनादि देवी अंबिके तुम्हें सतत प्रणाम है... से शुरुआत हुई। इसके बाद मालिनी अवस्थी ने जब लोकगीत सैंया मिले लरकियां... गाया तो सामने बैठे दर्शक झूम उठे। फिर लोकगीतों और गजलों का सिलसिला शुरू हुआ जो देर शाम तक गुलजार रहा। उन्होंने मैं वारी वारी जाऊं प्रीतम प्यारे..., शाम-ए-फिराक अब न पूछ, आई और आकर चली गई..., दोनों जहां तेरी मोहब्बत में हार के वो जा रहा है कोई शबे गम गुजार के... और तुम ही तुम हो मेरी नफस में ये हकीकत है धोखा नहीं है, और आके देख लो खुद मेरे दिल में तुमसे कोई पर्दा नहीं है... जैसे नगमों से सजी संगीतमय नाट्य प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। इस नाट्य प्रस्तुति को मालिनी अवस्थी ने खुद ही लिखा और प्रस्तुत भी किया।

लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी।

लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी।

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