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यूपीः जहरीली शराब से 35 की मौत, कई अस्पताल में

Tue, 13 Jan 2015 07:35 PM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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राजधानी के मलिहाबाद में सरकार की नाक के नीचे चल रहे जहरीली शराब के कारोबार ने कई परिवार तबाह कर दिए। मरने वालों की संख्या 35 तक पहुंच चुकी है? मरने वालों में नौ मलिहाबाद, चार सरोजनीनगर और सात उन्नाव जिले के हैं। मंगलवार सुबह लोहिया अस्पताल में सुबह साढ़े छह बजे मलिहाबाद के घसीटे (65) ने भी दम तोड़ दिया।
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करीब 155 लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जिनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। मौतों का सिलसिला रविवार रात सरोजनीनगर से शुरू हुआ।

सोमवार सुबह मलिहाबाद गांव में एक के बाद एक लोगों के दम तोड़ने की सूचना से पुलिस-प्रशासन के अफसरों के होश उड़ गए।  अफसर मलिहाबाद पहुंचे और दतली गांव में शराब बनाने वाले जुगनू व घटरू सहित कई घरों पर छापे मारे।
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जुगनू तो पकड़ लिया गया लेकिन बाकी फरार हैं। शाम को नाराज ग्रामीणों ने जुगनू के मकान में भी आग लगा दी। पुलिस ने कई भट्ठियां, भारी मात्रा में महुआ, केमिकल और तैयार शराब जब्त की है।

एएसपी ग्रामीण हबीबुल हसन ने बताया कि रविवार को दतली गांव में भुइयां देवी मंदिर के मैदान में क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया गया था। टूर्नामेंट देखने आसपास के गांव से लोग आए थे।

शराब पीने के बाद बेहाल हुए लोग

मैच खत्म होने के बाद लोगों ने गांव के ही जुगनू और घटरू की बनाई हुई शराब पी। ग्रामीणों का कहना है कि शराब पीने वालों को उल्टियां होने लगीं और दिखाई देना बंद होने लगा। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को सूचना दी गई लेकिन कोई नहीं आया। इसके बाद ग्रामीण बीमार लोगों को खुद ही सीएचसी लेकर भागे।

सुबह 30 वर्षीय सिद्धेश्वर के दम तोड़ दिया। कुछ ही मिनट में सीएचसी में जहरीली शराब के शिकार लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। हालात बेकाबू होते देख मरीजों को ट्रामा सेंटर भेजा जाने लगा।

हालांकि, तब तक मलिहाबाद के आठ लोग दम तोड़ चुके थे। सीएचसी के अधीक्षक डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि जहरीली शराब पीने वाले कुल 88 मरीज आए थे जिसमें से चार-पांच महिलाएं भी थीं।

इन्हें विभिन्न अस्पतालों में रेफर किया गया है। उधर, टूर्नामेंट देखने आए उन्नाव के लोगों को भी हालत बिगड़ने पर स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। शाम तक उन्नाव के छह लोगों ने दम तोड़ दिया जबकि सरोजनीनगर में चार लोगों की मौत हुई।

जिला आबकारी अधिकारी, एसडीएम, सीओ सहित कई सस्पेंड
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के महकमे में अफसरों की लापरवाही से हुए बड़े हादसे से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।

अफसरों ने की मामला दबाने की कोशिश

अफसरों ने पहले तो मामला दबाने की कोशिश की, बाद में मुख्यमंत्री की नाराजगी के चलते लापरवाह अफसरों को सस्पेंड किया। निलंबित लोगों में जिला आबकारी अधिकारी लाल बहादुर यादव, एसडीएम, सीओ मलिहाबाद श्यामाकांत त्रिपाठी, इंस्पेक्टर मलिहाबाद अमर सिंह रघुवंशी, आबकारी इंस्पेक्टर वीवी मिश्रा सहित आबकारी के छह व मलिहाबाद थाना के आठ सिपाही शामिल हैं। वहीं, सूबे के आबकारी आयुक्त अनिल गर्ग और लखनऊ के संयुक्त आयुक्त से सरकार ने स्पष्टीकरण तलब किया है।

इनकी हुई मौत
मलिहाबाद के खड़ता गांव के मंगल प्रसाद (45) और उनका छोटा भाई सिद्धेश्वर (30), खड़ता का रामसजीवन (45) और राजू (30), दतली गांव के सियाराम (68), शिवराज उर्फ बदई (70), अटौरा के शिवराम मास्टर (45), पहाड़पुर के देशराज सिंह (50), रामपुर बस्ती के कृष्णपाल सिंह (35) रायबरेली से रिश्तेदारी में अटौरा गांव आए ननकऊ (25), सरोजनीनगर के रतौली गांव के मजरा मैनेजरखेड़ा निवासी नंदकिशोर (65)  व उसके भाई श्रीपाल (40), बैजनाथ (65) व प्रताप पासी (60) तथा उन्नाव के हसनगंज स्थित ताला सरैन गांव के सागर (38), किशन कुमार उर्फ नन्हू (38), छंगा (30), रामसनेही (56), रघुनंदन (40) और तेजापुर गांव के सतीश उर्फ छुटक्के (20)।
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बनाने और पीने वाली महिलाएं भी

20 मौतों के बाद जागी पुलिस ने जहरीली शराब बनाने वाले जुगनू को गिरफ्तार कर लिया है। मलिहाबाद के खड़ता गांव के प्रधान राममूर्ति ने मामले में दतली गांव के जुगनू, उसकी पत्नी पुष्पा, जगदीश उर्फ गटरू, फूलचंद व भूपेन्द्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है।

मलिहाबाद इलाके में शराब बनाने और पीने वालों में महिलाएं भी शामिल हैं। जुगनू की बहन पुष्पा के खिलाफ को एफआईआर दर्ज हुई ही है, उसके अलावा बीस से ज्यादा महिलाएं इस धंधे में जुड़ी हैं। शराब पीकर अस्पताल पहुंचने वालों में भी छह महिलाएं हैं।

मृतकों के परिवार को दो-दो लाख
सरकार ने जहरीली शराब से मृत लोगों के परिवार को दो-दो लाख रुपये देने और बीमारों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।

आम के लिए प्रसिद्ध इलाके में घरेलू उद्योग की तरह काला धंधा
मलिहाबादी आम के पहचाने जाने वाले इलाके में जहरीली शराब का धंधा घरेलू उद्योग की तरह फैला है। आबकारी महकमे और पुलिस के संरक्षण में एक दर्जन गांवों में करीब तीन दर्जन भट्टियों में जहरीली शराब बनाई जाती है।
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