राजकीय निर्माण निगम ने बिना सूचना जारी कर दिए 1047 करोड़ के वर्कआर्डर
राजकीय निर्माण निगम ने 641.45 करोड़ रुपये के अर्जित ब्याज को कोषागार में जमा नहीं किया। साथ ही संविदाकारों से एडवांस पर ब्याज के रूप में वसूली गई 7.47 करोड़ की धनराशि को भी सरकारी खाते में जमा करने के बजाय अपनी आय का हिस्सा बता दिया। निर्माण निगम के इकाई प्रभारियों ने भी जमकर अनियमितता बरती।
उन्होंने एमडी के आदेश के बिना और बोर्ड को सूचना दिए बगैर 1047 करोड़ के 52 कार्य आदेश (वर्क आर्डर) जारी कर दिए। ये सभी आदेश टेंडर के बजाय सूचीबद्ध ठेकेदारों से कोटेशन लेकर बांट दिए गए। निगम को 137 कार्यों में वित्तीय गड़बड़ियों के कारण 165.72 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।
ऊर्जा के बाद नोएडा एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा इक्विटी निवेश
सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार ने वर्ष 21-22 और 22-23 में ऊर्जा के बाद सबसे ज्यादा इक्विटी निवेश नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किया। इन दो वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के 12 निगमों में 24795 करोड़ का निवेश किया गया। इसमें अकेले लगभग 21500 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड और उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन में किया गया।
दूसरे नंबर पर 1325 करोड़ के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और तीसरे नंबर पर 1257 करोड़ के साथ यूपी मेट्रो रेल कारपोरेशन रहा। इसके अलावा नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन, राज्य सड़क परिवहन निगम, मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन, बरेली स्मार्ट सिटी, कानपुर स्मार्ट सिटी, मुरादाबाद स्मार्ट सिटी और प्रयागराज स्मार्ट सिटी भी शामिल है।