सीएसआईआर-एनबीआरआई लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. सचित्र कुमार रथ के नेतृत्व में डॉ. संदीप के. बेहेरा और डॉ. विनय साहू की टीम ने शुक्रवार को बाराबंकी स्थित सराय बरई वेटलैंड का दौरा किया। टीम ने यहां समृद्ध जैव विविधता का अध्ययन करने के साथ ही पानी और जलीय वनस्पतियों के नमूने भी एकत्र किए।
इसके अलावा रिसर्च ने टीम वेटलैंड का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने वेटलैंड की जैव विविधता, जलीय वनस्पतियों तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित वैज्ञानिक आंकड़े भी जुटाए। इस अध्ययन का उद्देश्य वेटलैंड क्षेत्र को समझने और उसके संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कदम उठाना है।
इसलिए जरूरी हैं वेटलैंड
वेटलैंड प्रकृति के अनमोल संसाधन हैं, जो पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये भूजल स्तर बनाए रखने, वर्षा जल संचयन और बाढ़ के प्रभाव को कम करने के साथ प्राकृतिक फिल्टर की तरह जल की गुणवत्ता सुधारते हैं। वेटलैंड जलीय जीवों, मछलियों तथा स्थानीय और प्रवासी पक्षियों को प्राकृतिक आवास देते हैं और जैव विविधता के संरक्षण में सहायक हैं। साथ ही ये जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और स्थानीय समुदायों की आजीविका को सहारा देने में योगदान देते हैं।
प्रदेश के रामसर साइट
ऊपरी गंगा नदी (ब्रजघाट से नरोरा तक), जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) (बलिया), पटना पक्षी अभयारण्य (एटा), नवाबगंज पक्षी अभयारण्य (उन्नाव), सांडी पक्षी अभयारण्य (हरदोई), समसपुर पक्षी अभयारण्य (रायबरेली), पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य (गोडा), समान पक्षी अभयारण्य (मैनपुरी), सरसई नवार झील (इटावा), सूर सरोवर (कीथम झील) (आगरा), बखीरा वन्यजीव अभयारण्य (संत कबीर नगर), हैदरपुर आर्द्रभूमि (बिजनौर और मुजफ्फरनगर), शेखा झील (अलीगढ़)।
डॉ. सचित्र बताते हैं कि अध्ययन के दौरान वेटलैंड्स पर बढ़ते मानव हस्तक्षेप का भी आकलन किया जाएगा। यह पता लगाएंगे कि किन-किन वेटलैंड्स के आसपास खेती हो रही है और कहां जल क्षेत्र में सिंघाड़े की खेती व कीटनाशकों का प्रयोग तथा मछली पालन किया जा रहा है।
वहां से लिए नमूनों से पता चलेगा कि इन गतिविधियों से वेटलैंड की पारिस्थितिकी, पानी की गुणवत्ता और वहां मौजूद जलीय वनस्पतियों व जीव-जंतुओं पर क्या असर पड़ रहा है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि मानवीय गतिविधियां वेटलैंड की जैव विविधता और प्राकृतिक स्वरूप को किस हद तक प्रभावित कर रही हैं, ताकि संरक्षण के लिए प्रभावी उपाय किए जा सकें।