राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने गुरुवार को राजधानी में महारैली कर सरकार को ताकत दिखाई। कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि अब तक कई बार समझौते हो चुके हैं लेकिन आदेश आज तक जारी नहीं हुए।
कर्मचारियों की भारी संख्या को देखते हुए मुख्य सचिव आलोक रंजन ने दोपहर में उनके नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया। छह मिनट चली इस बातचीत में कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अब मुख्यमंत्री से ही वार्ता कर वे अपनी बात रखेंगे।
इसके बाद कर्मचारी नेता वापस लक्ष्मण मेला मैदान स्थित धरना स्थल चले आए। यहां से जुलूस की शक्ल में जवाहर भवन तक गए। बाद में ये लोग वापस धरना स्थल आ गए। अक्तूबर से राज्य कर्मचारी विभिन्न चरणों में आंदोलन करेंगे।
23 फरवरी 2016 से पूर्णकालिक हड़ताल का निर्णय किया गया है। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी व महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि यह महारैली इसलिए करनी पड़ रही है क्योंकि 2013 में परिषद ने राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के जरिये लंबी हड़ताल की थी।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह हड़ताल वापस हुई थी। कोर्ट ने चार प्रमुख मांगें पूरी करने के निर्देश दिए थे लेकिन डेढ़ साल बाद भी सरकार इसे पूरा नहीं कर सकी है।
विधानभवन घेरना था उद्देश्य
महारैली के लिए लक्ष्मण मेला मैदान में हजारों की तादाद में राज्य कर्मचारी गुरुवार को यहां पहुंचे थे। उन्होंने विधानभवन तक घेराव का कार्यक्रम बनाया था लेकिन बाद में मुख्य सचिव से वार्ता के बाद कर्मचारी नेताओं ने यह कार्यक्रम निरस्त कर दिया। उन्होंने आंदोलन की अगली रणनीति बनाकर महारैली खत्म की।
इसे संबोधित करने वालों में अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष यदुवीर सिंह, महामंत्री अतुल मिश्रा, भूपेश अवस्थी, विनय श्रीवास्तव, शिवबरन यादव, एसके रावत, विष्णु तिवारी, गिरीश मिश्रा, यादवेन्द्र मिश्र, एसपी श्रीवास्तव, मुदित मिश्रा, एसपी मिश्रा, प्रेम सिंह राणा, मनोज श्रीवास्तव आदि प्रमुख थे।
इस तरह होगा आंदोलन
-दो अक्तूबर को सभी जिलों में गांधी प्रतिमा एवं मुख्यालयों पर मौन धरना
-23 नवंबर को पेंशन के मुद्दे पर रेलवे सहित सेंट्रल कर्मचारी यूनियन के साथ ही राज्य कर्मचारी भी प्रदेश बंद करेंगे
-14 व 15 दिसंबर को दो दिवसीय पेन डाउन सांकेतिक हड़ताल
-23 फरवरी 2016 से पूर्णकालिक हड़ताल
विभिन्न जिलों में रोकी गईं बसें
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के नेताओं ने महारैली में शामिल होने के लिए जिलों से आ रहे कर्मचारियों की बसों व अन्य वाहनों को रोकने का आरोप लगाया है। अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी ने मुख्य सचिव से इसकी शिकायत भी की। मुख्य सचिव ने कहा, सरकार ने कर्मचारियों की बसों को रोकने के कोई आदेश नहीं दिए हैं। उन्होंने पुलिस को निर्देश भी दिए कि यदि कहीं वाहन रोके गए हैं तो उन्हें तत्काल छोड़ दिया जाए।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
-केंद्र की भांति राज्य कर्मियों को सभी प्रकार के भत्ते दिए जाएं
-नई पेंशन व्यवस्था खत्म कर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए
-7, 14 व 20 वर्ष में नियुक्ति की तिथि को आधार मानकर एसीपी का निर्धारण हो
-रिटायरमेंट की उम्र 62 वर्ष की जाए
-विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियां दूर की जाएं
-निजीकरण, आउटसोर्सिंग व ठेकेदारी व्यवस्था खत्म की जाए
-फील्ड कर्मचारियों को मोटरसाइकिल भत्ता दिया जाए
-लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों के वेतनमान उच्चीकृत किए जाएं। इनकी पदोन्नति में पांच वर्ष की बाध्यता समाप्त हो
-प्रत्येक विभाग में पदोन्नति के लिए कम से कम 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया जाए
-रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए
-वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का पद राजपत्रित घोषित हो
-संविदा, पीआरडी, होमगार्ड सहित सभी कर्मियों को न्यूनतम 11 हजार वेतन दिया जाए। इनका वेतन मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाए
-मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के नेताओं को परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा
-सभी निगमों को सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो से मुक्त कर शासनादेश का सीधा लाभ दिया जाए