बिल्डिंग में लगा कैमरा
- फोटो : amar ujala
जांच के दौरान घटनास्थल से मिली पुलिस कर्मियों की बाइक में हुई टूट-फूट का भी विशेषज्ञ स्तर पर परीक्षण कराया गया। परीक्षण में यह बात साबित नहीं हो पायी कि बाइक को एसयूवी से सीधे या साइड से जोर की टक्कर मारी गई हो।
ऐसा होने पर बाइक में इस्तेमाल होने वाली फाइबर व प्लास्टिक युक्त एसेसरीज मसलन ब्रेक, गियर लीवर व मडगार्ड का बुरी तरह क्षतिग्रस्त होना तय था, लेकिन बाइक में गंभीर क्षति या टूट-फूट नहीं मिली। इसके चलते विवेक की एसयूवी द्वारा बाइक को टक्कर मारने की पुलिसिया थ्योरी संदेह के घेरे में दिखी।
घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद के साथ ही घायल को लोहिया अस्पताल पहुंचाने वाले पुलिस कर्मियों, इलाज करने वाले डॉक्टरों व स्टाफ सहित मृतक के परिवारीजनों से भी अलग-अलग बातचीत कर बयान दर्ज किए गए। इस दौरान घटनास्थल से जुड़े वास्तविक तथ्यों को परखने के लिए पैक्सफेड कार्यालय पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज का भी परीक्षण हुआ, लेकिन घटना स्थल तक कैमरे की पहुंच न हो पाने से फुटेज जांच में मददगार साबित नहीं हो पाया।
जांच अधिकारी ने जनसमुदाय से भी अपील की है कि उक्त घटना के संबंध में किसी भी तरह की कोई मौखिक जानकारी अथवा लिखित साक्ष्य बयान दर्ज कराने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर स्थित उनके कोर्ट कक्ष संख्या-46 में 18 अक्तूबर तक किसी भी न्यायालय दिवस (अवकाश को छोड़कर) संपर्क कर साक्ष्य या बयान दे सकते हैं।